शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण "गैरसैंण"  gairsain news uttatrakhand dehradun । youth icon yi media report award

Avikasit Bhroon Gairsain : शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण “गैरसैंण” 

 

 

जब 80 के दशक में उत्तराखण्ड की जनता ने गैरसैंण को तहेदिल से अपनी राजधानी उद्घोषित कर दिया था। राजधानी को लेकर सियासत के गलियारों में भी कहीं कोई वाद-विवाद नहीं था। सन्‌ 1994 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित रमाशंकर कौशिक समिति की रिपोर्ट भी यही दर्शाती है कि राज्य की जनता गैरसैंण में ही राजधानी चाहती है। लेकिन इसके बावजूद जन भावनाओं के खिलाफ निरंतर गैरसैंण के मुद्दे को सियासी दांव-पेंचों से उलझाया जाता रहा है। इस सम्बन्ध में 2001 में भाजपा की अंतरिम सरकार ने बिना वजह राजधानी चयन आयोग का गठन कर दिया और फिर खंडूरी राज के चलते इस आयोग का कार्यकाल 11 बार बढ़ाया गया। इस दौरान राज्य की अस्थाई राजधानी देहरादून में विकास कार्य जोर-शोरों से होते रहे हैं । भाजपा की मंशा कभी भी गैरसैंण को राजधानी बनाने की नहीं रही। यही वजह है कि उसने इस मुद्दे को उलझाए रखने में ही अपनी समझदारी समझी है आज तक । फिर यही ढोंग विजय बहुगुणा (अब पूर्ण रूप से बीजेपी में) के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने भी किया और हरीश रावत सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी इस मुद्दे को भटकने की । उक्रांद ने भी कांग्रेस को गैरसैंण के मुद्दे पर ही समर्थन दिया था लेकिन बिकने की आदत जो ठहरी शुरू से ही, इसलिए वो भी हमेशा मौन ही रही इस मुद्दे पर ….. आगे पढ़ें विस्तार से हिमांशु पुरोहित की खास रिपोर्ट । 

हिमांशु पुरोहित YOUTH ICON Yi media award . Himanshu Purohit . News
हिमांशु पुरोहित 

गैरसैंण, शायद इस शब्द की नियति गैर नामिक संदर्भ से ही होगी…? लेकिन गैरसैंण मात्र कोई जगह, विचार या परिकल्पना नहीं बल्कि हमारी एक संगठित संस्कृति भी है । लेकिन यह सब राज्य के लोकतंत्र के मानसिक वेदना की मात्र अभिव्यक्ति की आजादी है l जाने हाल कि, गैरसैंण एक बार फिर चर्चा का मुद्दा बन गया है। गत 7 दिसम्बर को वहां उत्तराखण्ड सरकार की विधानसभा सत्र की संचालित किया गया । इस बीच सरकार ने बहुप्रतीक्षित उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण विधेयक 2017 को पारित किया और साथ ही सरकार ने ट्रांसफर को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया। इसके साथ-साथ रावत सरकार ने यह भी फैसला लिया कि कार्यमंत्रणा की बैठक में यदि लोकायुक्त विधेयक पर आम सहमति बनती है, तो वह इसके लिए भी तैयार है। सत्र का पहला दिन पिछले सत्रों से इस प्रकार जुदा दिखा कि विपक्ष ने सदन में बहुत ज्यादा शोर-शराबा नहीं किया। सरकार हवन करके सदन में पहुंची तो विपक्ष सधे अंदाज में उसकी राह ताक रहा था। पिकनिक विधानसभा का कार्यक्रम शुरू होते ही विपक्ष ने पहले प्रश्नकाल में फिर स्थगनकाल प्रस्ताव के दौरान तेवर दिखाए। और निकायों के सीमा विस्तार, किसानों के गन्ना मूल्य, चीनी मिलों के बंद करने के साथ साथ गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की और इस प्रकार फिर दोनों सौतेले दलों के बीच शुरू हो गया गैरसैंण पर सियासत का संग्राम ।

शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण "गैरसैंण"  gairsain news uttatrakhand dehradun । youth icon yi media report award
शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण “गैरसैंण”  । आखिर कब तक उत्तराखंड के नेताओं को रहेगा गैरसैंण से बैर ? 

जब 80 के दशक में उत्तराखण्ड की जनता ने गैरसैंण को तहेदिल से अपनी राजधानी उद्घोषित कर दिया था। राजधानी को लेकर सियासत के गलियारों में भी कहीं कोई वाद-विवाद नहीं था। सन्‌ 1994 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित रमाशंकर कौशिक समिति की रिपोर्ट भी यही दर्शाती है कि राज्य की जनता गैरसैंण में ही राजधानी चाहती है। लेकिन इसके बावजूद जन भावनाओं के खिलाफ निरंतर गैरसैंण के मुद्दे को सियासी दांव-पेंचों से उलझाया जाता रहा है। इस सम्बन्ध में 2001 में भाजपा की अंतरिम सरकार ने बिना वजह राजधानी चयन आयोग का गठन कर दिया और फिर खंडूरी राज के चलते इस आयोग का कार्यकाल 11 बार बढ़ाया गया। इस दौरान राज्य की अस्थाई राजधानी देहरादून में विकास कार्य जोर-शोरों से होते रहे हैं । भाजपा की मंशा कभी भी गैरसैंण को राजधानी बनाने की नहीं रही। यही वजह है कि उसने इस मुद्दे को उलझाए रखने में ही अपनी समझदारी समझी है आज तक । फिर यही ढोंग विजय बहुगुणा (अब पूर्ण रूप से बीजेपी में) के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने भी किया और हरीश रावत सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी इस मुद्दे को भटकने की । उक्रांद ने भी कांग्रेस को गैरसैंण के मुद्दे पर ही समर्थन दिया था लेकिन बिकने की आदत जो ठहरी शुरू से ही, इसलिए वो भी हमेशा मौन ही रही इस मुद्दे पर । 
अब सवाल यह है कि गैरसैंण में कैबिनेट की बैठक बुला देने या विधानसभा सत्र कार्यक्रम करके बीजेपी सरकार अपने तरकस में कौन सा ऐसा तीर चला लेगी कि जो लक्ष्य को भेद पहाड़ के विकास के वो मार्ग खोल दे..? जिसका इंतजार राज्य की जनता सत्रह साल से कर रही है l
यूँ तो भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी ने भी तो गंगा किनारे कैबिनेट बुलवाई थी। लेकिन कभी गैरसैंण के बोल नहीं बोले, कुछ मंत्रीगण गैरसैंण तो ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की संरचना बुन रहे हैं, क्योंकि उनके लिए गैरसैंण पिकनिक स्पॉट हो सकता है, लेकिन जनाब हमारी तो यह आत्मा है। वास्तव में गैरसैंण मात्र कोई जगह नहीं बल्कि एक विचार है, हमारे विकास की परिकल्पना है और हमारी एक संगठित संस्कृति भी जिसको हमारे आन्दोलनकारियों और शहीदों ने अपने रक्त से सींचा हैl जिनके लिए उन्होंने कई वर्षों तक सड़कों पर संद्घर्ष किया और अपनी अस्मत की कीमत तक चुकाई ।
आखिर गैरसैंण पर सदैव राजधानी के छलावे युक्त परिधान ढोंग करने वालों को यह बात क्यों नहीं समझ में आती है, भूल जाते हैं कि मोहन बाबा उत्तराखण्डी ने अनेक बार अनशन कर गैरसैंण के लिए यूं ही अपने प्राणों की बाजी नहीं लगा दी। 2004 में 38 दिन के अनशन के दौरान बाबा ने अपने प्राणों को पहाड़ को समर्पित कर दिया l
खेर, हमारा रावत सरकार को सुझाव है कि अपने द्वारा इस सकारात्मक पहल के साथ अगर वे केंद्रीय वित्त आयोग से राजधानी निर्माण के लिए सहायता लेते हैं तो यह सराहनीय कदम होगा आपके इस ढोंग की तुलना में । और एक बात संज्ञान ने लाने की आवश्यकता है कि यदि रावत सरकार वास्तव में गैरसैंण के बारे में गंभीर है तो राजधानी के निर्माण के लिए एक “विकास प्राधिकरण” गठित करे । सार्वजनिक निर्माण विभाग को काम देने के बजाए प्राधिकरण से काम करवाना बेहतर होगा। इससे राजधानी के नाम पर भ्रष्टाचार करने पर अंकुश लगाने में काफी हद तक सहूलियत रहेगी। और शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण “गैरसैंण“ पहाड़ की कोख से जन्म ले सके !

By Editor

One thought on “Avikasit Bhroon Gairsain : शहीदों के रक्त से संचित और आज की सियासत का एक अविकसित भ्रूण “गैरसैंण” ”
  1. yuva warg ko phir se ekjut hokar pahad ki asmita aur astitva ke liye ladna hoga. aandolan se janma rajya, rajdhani ke liye phir se ek bade janaandolan ki maang kar raha hai.

Comments are closed.