Jyoti badawa . Jyoti Neeraj Khairaat . Tulsi singh Bisht . Youth icon yi media award . Shashi bhushan maithani paras क्या कोई भी IAS , IPS , IFS य PCS किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को सरेआम व्यक्तिगत टिप्पणी कर सकता है । ये कौन सी शिक्षा है । मुझे भी आज वर्ष 2009 की एक घटना सामने दिखाई दे रही जब चमोली में तैनात एक राहुल नाम के अधिकारी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पेपर वेट से हमला करने वाला था । हमले की हम भी निंदा करते हैं लेकिन अधिकारियों को भी अपनी एक निश्चित सीमा में बने रहना भी उतना ही जरूरी है जितना एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को । देश के संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि IAS का स्वाभिमान गैर IAS से ज्यादा होता है । IAS होने मतलब यह कत्तई नहीं होता है कि आप किसी भी कर्मचारी को तू जैसे गंदे व भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करें । आपको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से काम लेना है तो जमकर लो नियमानुसार लो लेकिन गाली देने या किसी का मजाक उड़ाने का अधिकार कैसे किसी ऑफिसर को मिल जाता है ।

Condemnation : चौतरफा निंदा से घिरी IAS अफसर को क्या मिलेगा सबक ? 

* उत्तराखंड में IAS के सामने जाओ तो शीशा जरूर देख लेना ! 

क्या कोई भी IAS , IPS , IFS य PCS किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को सरेआम व्यक्तिगत टिप्पणी कर सकता है ? ये कौन सी शिक्षा है ? मुझे भी आज वर्ष 2009 की एक घटना सामने दिखाई दे रही है, कि जब चमोली में तैनात एक राहुल नाम के अधिकारी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पेपर वेट से हमला करने वाला था । हमले की हम भी निंदा करते हैं लेकिन अधिकारियों को भी अपनी एक निश्चित सीमा में बने रहना भी उतना ही जरूरी है जितना एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को । देश के संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि IAS का स्वाभिमान गैर IAS से ज्यादा होता है । IAS होने मतलब यह कत्तई नहीं होता है कि आप किसी भी कर्मचारी को तू ता, रे – रा जैसे गंदे व भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करें । आपको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से काम लेना है तो जमकर लो, नियमानुसार लो लेकिन गाली देने या किसी का मजाक उड़ाने का अधिकार कैसे किसी ऑफिसर को मिल जाता है । और जो अधिकारी ऐसा करे तो समझो वह अपनी शिक्षा के अलावा अपने पारिवारिक संस्कारों की नुमाईश करता है । वह समाज को बताता है कि यह उसके परिवार या घर की आम भाषा है । 

Shashi Bhushan Maithani ‘Paras’

देश की सबसे बडी सेवा के अधिकारियों से कम से कम शिष्टाचार की उम्मीद तो रखी जानी चाहिए क्योंकि शेष उम्मीदें बीते 17 सालों में किस तरह से उत्तराखंड में दम तोड़ते दिखी है उससे हम सब अवगत हैं । ताजा वाकिया  चार धाम से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक का है , जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी जिनकी अधिकारी के अलावा एक बहुत बड़ी सामाजिक पहचान भी है । क्योंकि वे एक अध्ययनशील व आध्यात्मिक व्यक्ति भी हैं । और अगर ऐसे सामाजिक प्रतिष्ठा वाले बुद्धिजीवी व्यक्ति को अधिकारियों व कर्मचारियों की भरी बैठक में खड़ाकर जलील कर अपमानित किया जाता है तो सवाल भी स्वतः ही खड़े हो उठेंगे । इस तरह का छिछेले व्यवहार के बाद तो यही कहा जा सकता है कि ये एक IAS होने का अभिमानी भाव ही है कि वो किसी को भी, कभी भी, किसी भी स्थान पर अपमान कर सकते हैं ।
दूसरी ओर यह उस कर्मचारी की सहनशीलता व संस्कार ही हैं कि उन्होंने IAS महिला अधिकारी को ज़बाब देने के बजाय अपने स्वाभिमान से समझौता न करते हुए सीधे उसी IAS के समक्ष अपना स्तीफा प्रस्तुत कर दिया ।
ताज्जुब की बात ये कि सूत्रों के हवाले से  हुआ कि लगभग 30 से 34 साल उम्र की IAS ज्योति नीरज खैरवाल जो कि GMVN अधिकारी 60 वर्षीय तुलसी सिंह बिष्ट की बेटी की उम्र से भी कम की होगी के द्वारा श्री बिष्ट के साथ किया गया दुर्व्यवहार यह साबित करता है कि उत्तराखंड की नौकरशाही निम्न दर्जे तक सिर्फ बेलगाम ही नहीं बल्कि अशिष्ट भी हो चुकी है । और यहां ये भी स्पष्ट कर दें कि उत्तराखंड में ये कोई नई बात नहीं है जो कि पहली बार ही देखने या सुनने को मिल रही हो । आए दिन इस प्रदेश में सोशल मीडिया से लेकर अखबारों के पन्नों में IAS सुर्खियों में रहते हैं और वह किसी सामाजिक अभियानों के लिए नहीं बल्कि इसी तरह के अभिमानी अव्यवहारिक मामलों में सुर्खियां बटोरते देखे जा सकते हैं । IAS राकेश शर्मा (सेवानिवृत) इसके लिए उपयोगी उदाहरण हैं जो सोशल मीडिया के अलावा सभी मीडिया तंत्रों की सुर्खियों में रहे हैं । हालांकि उन पर कभी बदजुबानी का आरोप नहीं रहा  । ज्यादा पढ़े लिखे अधिकारी अगर बदतमीजियों या बदजुबानियों के चलते सुर्खियां बटोर रहे हैं तो अब किसी भी मां बाप को अपने बच्चों को IAS बनाने से पहले सो दफा सोचना होगा या फिर अपने बच्चे में घरेलू तमीज तहज़ीब व संस्कारों को कूट-कूट कर भरना होगा । क्योंकि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास करने से सफलता जरूर मिल सकती है लेकिन सभ्यता और संस्कार तो बिल्कुल भी नहीं, जिसका अभाव आजकल पढ़े लिखे लोगों में ज्यादा है । जिन्हें न किसी की उम्र का खयाल है और नहीं किसी की भावनाओं का । उत्तराखंड सरकार को चाहिए कि अब वो ऐसे अधिकारियों को एक नियत समय पर शिष्टाचार व नैतिक शिक्षा का भी पाठ पढ़ाने की व्यवस्था बनाए ।
यह भी गौर करने वाली बात है कि हर बार अलग-अलग दलों की गठित सरकार में एक परिपाठी उत्तराखंड में देखी जा रही है कि यहां सत्ता पर कुछ विशेष IAS दंपतियों का जोरदार कब्जा देहरादून से लेकर दिल्ली तक बन जाता है । और तो और महत्वपूर्ण विभागों पर भी कब्जा जमा देते हैं । आज तक यह कोई न समझ सका कि इनके पास ऐसी कौन सी चमत्कारिक अल्लादीन की चिराग या स्यालसिंघी है कि इनके आगे सूबे के हर निजाम की ज़ुबान सील जाती है ।
हम तो यही सलाह देंगे कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अगर समय रहते कुछ अफसरों की सर्जरी नहीं की तो ये उन्हें भारी पड़ेंगे । क्योंकि इन अफसरों को 60 साल में रिटायर होना है जबकि सीएम साहब को अगले 4 साल बाद फिर से जनता की ही चौखट पर खड़ा होना है ।

IAS सामने शीशा देखकर ही जाएं अब : 

जी हाँ ….! बेशक आपको थोड़ा पढ़ने या सुनने में अजीब सा लग रहा होगा पर यह बात सच है । और यह हम नहीं बल्कि एक अधिकारी ही बता रहे हैं, जिन्हें भारत के सबसे बुद्धिमान मानी जाने वाली IAS टोली के एक महिला अधिकारी ने भरी सभा में आईना दिखा दिया । 

IAS होने का मतलब यह तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता कि आप अपने अधीनस्थ किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को जलील कर लें । सभ्यता , सादगी में रहने वाले लोग हमेशा बुद्धिमान कहे जाते हैं, फिर चाहे वह कम पढ़ा हो ज्यादा । इसलिए अपनी डिक्री ओहदे का रौब दिखाना बुद्धिमता नहीं बल्कि आपके अभिमान (घमण्ड) को दर्शाता है । यह भी सच है कि जिनके पास सादगी तमीज तहज़ीब ही न हो तो उन्हें समाज हमेशा निम्न दृष्टि से देखता है फिर चाहे वह डीएम, सीएम या पीएम ही क्यों न हो ।
उत्तराखंड में GMVN के अधिकारी तुलसी बिष्ट , IAS महिला अधिकारी के मुंह से निकले दो शब्दों से इस कदर आहत हुए कि उन्होंने नौकरी त्यागने का ही फैसला ले लिया ।  वाकही जिस तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है और जिस प्रकार बिष्ट का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, यह बहुत छोटी बात तो नहीं है , इसको बेहद गंभीरता से लेने की सख्त जरूरत है ।

Jyoti badawa . Jyoti Neeraj Khairaat . Tulsi singh Bisht . Youth icon yi media award . Shashi bhushan maithani paras क्या कोई भी IAS , IPS , IFS य PCS किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को सरेआम व्यक्तिगत टिप्पणी कर सकता है । ये कौन सी शिक्षा है । मुझे भी आज वर्ष 2009 की एक घटना सामने दिखाई दे रही जब चमोली में तैनात एक राहुल नाम के अधिकारी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पेपर वेट से हमला करने वाला था । हमले की हम भी निंदा करते हैं लेकिन अधिकारियों को भी अपनी एक निश्चित सीमा में बने रहना भी उतना ही जरूरी है जितना एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को । देश के संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि IAS का स्वाभिमान गैर IAS से ज्यादा होता है । IAS होने मतलब यह कत्तई नहीं होता है कि आप किसी भी कर्मचारी को तू जैसे गंदे व भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करें । आपको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से काम लेना है तो जमकर लो नियमानुसार लो लेकिन गाली देने या किसी का मजाक उड़ाने का अधिकार कैसे किसी ऑफिसर को मिल जाता है ।
IAS अधिकारी ज्योति नीरज खैरवाल की व्यक्तिगत टिप्पणी  से क्षुब्ध हुए GMVN के AGM  तुलसी बिष्ट । 

ये वाकही बहुत ताज्जुब की बात है कि आजकल मुट्ठीभर चंद ऐसे अधिकारी उत्तराखंड में काबिज हैं जिन्हें किताबी ज्ञान के आधार पर ऊंची डिक्री व ओहदा तो मिल गया लेकिन उन्हें अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से बात करने का रत्तिभर सलीखा नहीं आ पाया ।
आपको बता दें कि GMVN में AGM पद पर तैनात उम्रदराज तुलसी सिंह बिष्ट के स्वाभिमान को बेहद कम उम्र की महिला IAS ज्योति नीरज खैरवाल ने इस कदर झकजोरा कि AGM स्तर के अधिकारी बिष्ट ने नौकरी छोड़ने में ही भलाई समझी । बिष्ट ने अपने पत्र में साफ किया कि IAS ने चारधाम यात्रा की मीटिंग के दौरान उनके ऊपर बेहद ही व्यक्तिगत टिप्पणी की । (पत्र की कॉपी हमारे पास भी मौजूद है ) जिससे उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंची है । 

साफ है कि उम्र के इस पड़ाव में AGM तुलसी भट्ट मान सम्मान को ठेस पहुंची हो जिसके बाद उन्होंने यह तय कर लिया कि उनके लिए अब ऐसे अधिकारियों के सानिध्य में काम करना असंभव है ।
वाकही इस बात को समाज के हर व्यक्ति को समझना जरूरी है कि क्या कोई भी IAS , IPS , IFS य PCS किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को सरेआम व्यक्तिगत टिप्पणी कर सकता है । ये कौन सी शिक्षा है । मुझे भी आज वर्ष 2009 की एक घटना सामने दिखाई दे रही जब चमोली में तैनात एक राहुल नाम के अधिकारी पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पेपर वेट से हमला करने वाला था । हमले की हम भी निंदा करते हैं लेकिन अधिकारियों को भी अपनी एक निश्चित सीमा में बने रहना भी उतना ही जरूरी है जितना एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को । देश के संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि IAS का स्वाभिमान गैर IAS से ज्यादा होता है । IAS होने मतलब यह कत्तई नहीं होता है कि आप किसी भी कर्मचारी को तू जैसे गंदे व भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करें । आपको अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से काम लेना है तो जमकर लो नियमानुसार लो लेकिन गाली देने या किसी का मजाक उड़ाने का अधिकार कैसे किसी ऑफिसर को मिल जाता है । जो भी अधिकारी अपने कर्मचारियों पर बे-वजह रौब ग़ालिब करता है ये हर अधिकारी को समझने की जरूरत है ।
सिस्टम में बैठे उच्च पदस्थ अधिकारी न जाने आए दिन कितने तुलसी सिंह बिष्टों को आईना देखने की नसीहत देते होंगे लेकिन आज मामला उन तुलसी सिंह बिष्ट से जुड़ा हुआ है जिनका आध्यात्मिक और बौद्धिक जीवन से लदा कदा शरीर उत्तराखंड के हर एक जनमानस के बीच सम्मान पाता है । फिर ऐसे व्यक्ति को जब उनकी बेटी से छोटी उम्र की अधिकारी शीशे में शक़्ल देखने को कहे तो इस बात की सर्वत्र जितनी निंदा की जाय उतना कम ही कम है ।
GMVN के AGM तुलसी बिष्ट ने अपने पत्र में साफ साफ लिखा है कि IAS ज्योति नीरज खैरवाल ने उनके ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी कर उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाया है इसलिए वह अपनी नौकरी से वक्त से पहले ही सेवानिवृति लेना चाहते हैं । आपको यहां भी बताना चाहेंगे कि श्री बिष्ट महज दो माह बाद रिटायर होने वाले हैं ऐसे में जब उनकी सालों की मेहनत को सराहा जाना चाहिए था उनके ससम्मान विदाई होनी थी ठीक उसके उलट उन्हें IAS ने शीशे में शक़्ल देखने की नसीहत दे डाली । तुलसी सिंह बिष्ट अध्ययनशील व्यक्ति हैं । जिसकी वजह से विभाग से इतर समाज में उन्हें एक अलग ओहदा प्राप्त है । प्रदेशभर के बुद्धिजीवी वर्ग में श्री बिष्ट के सामाजिक व रचनात्मक जीवन की चर्चा आम है । जिन्होंने अपनी रचनात्मक व अध्ययनशील सोच के बूते GMVN जैसे महत्वपूर्ण विभाग को बीते 36 वर्षों में सर्वाधिक मजबूती दी है ।
अंत में हम डंके की चोट पर यही कहेंगे और लिखेंगे कि दूसरों को आईना देखने की नसीहत देने वालों को खुद भी शीशा साथ में रख लेना चाहिए ।

वाकही अगर बात इतनी बड़ी है तो ऐसे लोग

कभी भी आइकॉन नहीं कहे जा सकते हैं । 

By Editor

3 thoughts on “Condemnation : चौतरफा निंदा से घिरी IAS अफसर को क्या मिलेगा सबक ?  * उत्तराखंड में IAS के सामने जाओ तो शीशा जरूर देख लेना ! ”
  1. इन I.A.s. की योग्यता देखें कि 27.5.2017के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में निर्णय को आज तक लागू नहीं कर पाए। मुख्य मंत्री ने आदेश दिया था कि गढ़वाल मंडल विकास निगम को आपदा क्षति पूर्ति के कारण तथा ऐसे कर्मचारियों के वेतन भुगतान जो हैं तो निगम के कर्मचारी पर कई सालों से शाशन में सेवा दे रहे है की क्षतिपूर्ति हेतु तथा सेवानिवृत कर्मचारियों को 4 साल सेवा निवृतिः हुए हो गए पर उनके अवशेष देयकों का भुगतान आज तक नहीं हुआ ।जब कि शाशन में 11करोड़ और 10 करोड़ की पत्रावली मुख्य मंत्री की स्वीकृति हेतु 10 माह से निलंबित है। सबके भुगतान हो रहे हैं पर कर्मचारियों अवशेष के भुगतान नहीं हो रहे है। कारण? कारण शरीर में छुपा है।

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