Kusum jain . Dr. Rakesh kumar jain । dr. R. K. Jain वो दीवारों पर चढ़कर खिड़की से होते हुए बॉलकनी तक पहुंच गई, पर फिर भी कुसुम को नहीं हुआ कोई एतराज ! समौण, कुसुम जैन के बगीचे की ! Dehradun

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वो दीवारों पर चढ़कर खिड़की से होते हुए बॉलकनी तक पहुंच गई, पर फिर भी कुमकुम को नहीं हुआ कोई एतराज !

समौण, कुमकुम जैन के बगीचे की !

 

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◆ शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’

देहरादून में डालनवाला निवासी कुमकुम जैन का घर जैविक उत्पादों से भरा पड़ा है । घर के चारों ओर खाली पड़ी जगहों का सदुपयोग बहुत साफगोई से किया गया है । अहाते में बेरोक-टोक यहां से वहां तक फैलती बेलें मानों इस बात को लेकर खुश हैं कि उन्हें इस घर की मालकिन कुमकुम जैन के रहते कोई रोकने – टोकने वाला नहीं है । तभी तो शानदार बंगले की चमचमाती किसी भी दीवार से लगकर बेलें खिड़कियों से होते हुए बालकनी तक पहुंच गई हैं । और बेलें इतनी खुश हैं कि वह रोज कुसुम की दरियादिली के लिए उनके परिवार को फल भी दे रही हैं ।

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तस्वीरों में देखिए यह हैं देहरादून डालनवाला स्थित कुमकुम जैन का घर । यहां बताना चाहूंगा कि कुमकुम जैन, पद्मश्री डॉ. आर. के. जैन की धर्मपत्नी हैं । डॉ. जैन CMI अस्पताल के संस्थापक हैं व वर्तमान में उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी हैं । जिनके सम्पन्न घर में हर छोटे-बड़े काम के लिए कर्मचारी हैं, फिर भी घर की मालकिन को किचन गार्डनिंग का निराला ही शौक है । और उसका प्रतिफल सामने प्रत्यक्ष दिखाई भी दे रहा है । कुसुम बताती हैं कि अब वह कद्दू , बींस, और भिंडी खा- खाकर धित गई हैं । और अभी भी लगातार बेलें व पौधें उन पर मेरहरबान हुए जा रहे हैं ।

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वैसे अपने बाग – बगीचे की फल व सब्जियों का अपना अलग ही स्वाद रहता है । साथ ही एक अलग ही आनंद की अनुभूति भी प्राप्त होती है । क्योंकि इन्हें हम अपने हाथों से सींचते हैं, पालते पोषते हैं जिनकी शुद्धता पर कहीं से भी सवाल नहीं उठ सकता है । जो कि हर रोज हमारी रसोई के स्वाद को भी बढ़ा देती हैं ।

श्रीमती जैन ने अपने परिश्रम से बड़े ही सृजनात्मकता के साथ घर में शानदार बगिया सजाई है । कुसुम बताती हैं कि उन्हें घर के बाहर कहीं भी जो कोई छोटी सी भी खाली जगह दिखती थी तो वहां पर सब्जी का बीज या कभी कोई पौध को रोप लेती थीं । फिर चाहे वह मिर्च, टमाटर, भिंडी, बींस, ककोड़ा, तुरई हो या लोंकी, कद्दू । आगे वह बताती हैं कि जब

Kusum jain . Dr. Rakesh kumar jain । dr. R. K. Jain वो दीवारों पर चढ़कर खिड़की से होते हुए बॉलकनी तक पहुंच गई, पर फिर भी कुसुम को नहीं हुआ कोई एतराज ! समौण, कुसुम जैन के बगीचे की ! Dehradun shashi bhushan maithani paras

अपने हाथ से तैयार पौधें बड़ी होकर फल देने लगती हैं तो मन को बड़ा शुकून मिलता है । साथ ही वह यह भी जोड़ती हैं कि मेरा ऐसा करने से हमारी नई पीढियां जो केवल किताब के पन्नों में ही साग सब्जी की पौधें होने की बात जानते हैं, उन्हें घर में ही में पता चल जाता है कि, जिस सब्जी को हम बाजार में कुछ पैसे देकर झट्ट से उठाकर घर की रसोई तक ले आते हैं, उन्हें उगाने से लेकर तैयार करने तक में कितना परिश्रम व वक्त लग जाता है ।

कुमकुम  कहती हैं कि मुझे बगीचे और बगीचे में उगने वाली साग सब्जियों से भावनात्मक लगाव रहता है । मैं इनके लिए धूप, छांव व पानी आदि का पूरा ख़याल रखती हूँ । जहाँ तक मैं पहुंच सकती हूँ तो अपने हाथों से संभालती हूँ , बाकी दूर-दूर फैली बेलों को घर में काम करने वाले कर्मचारियों की मदद से सजाती संवारती हूँ । सभी का सहयोग रहता है ।

कुमकुम जैन अपने संदेश में कहती है कि देहरादून में हर किसी के घर में इतनी जगह है ही कि, वह एक कोने में छोटा सा किचन गार्डन तैयार कर लें । यदि नहीं है तो गमलों में पौध लगाएं । छोटी-छोटी पौधें जब बड़ी होने लगती है तो वह आपको खुशियां देती हैं । थोड़ा-थोड़ा गार्डन में वक़्त बिताने से मानसिक चिंता व तनाव से छुटकारा मिल जाता है । और साथ में पौष्टिक साग सब्जियां भी ।

घर के आंगन में कुमकुम जैन ने ऑर्गेनिक उत्पादों को उगाकर एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है । और ऐसे ही लोगों के काम हमेशा जीवन में याद रखे जाते हैं, जो जरा हटके होते हैं । बाकी तो आज डॉक्टर, मास्टर, इंजीनियर हर घर में मौजूद हैं । इन सबके बीच मौलिकता, रचनात्मकता, सृजनात्मकता जहां हैं वह सबसे अलग है ।
मैं अंत में यही लिखूंगा कि …. जीना है तो ऐसा जियो, जो दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक हो ।

◆ शशि भूषण मैठाणी “पारस”
स्वतंत्र – पत्रकार

By Editor

2 thoughts on “वो दीवारों पर चढ़कर खिड़की से होते हुए बॉलकनी तक पहुंच गई, पर फिर भी कुमकुम को नहीं हुआ कोई एतराज ! समौण, कुमकुम जैन के बगीचे की !”
  1. कुमकुम जी के कार्य की प्रंशसा होनी ही चाहिए थी। अपने शानदार कार्य से अपने घर पर ही साग सब्जी फल फूल उगाकर प्रकीर्ति की सेवा के साथ साथ ताजे सब्जियों का आनन्द भी उठा रहे है।मेहनत कभी फालतू नही जारी। कर्म ही पूजा है।
    बहुत बहुत धन्यवाद
    मैठाणी जी पाठकों के संज्ञान में उक्त स्टोरी को लाने के लिये

  2. Mrs Jain is doing an exemplary work which is an eye opener particularly to present youth who are busy with Mobiles gossiping with friends and others. Kitchen gardning enriched energy,keep u fresh and fit and provide u organic fresh vegetables and fruits. Thanks to Mrs Jain.

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