● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल । लेखक का संक्षिप्त परिचय : डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें..... dr. veerendra Bartwal

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अब पहाड़ की नारी, खेल रही है नई पारी ! काम कोई भी हो उसे करने में दिक्कत कहाँ आ री ।

सुखद आश्चर्य इसलिए कि पहाड़ की महिलाएं तो क्या पुरुष भी इस कार्य करने को राजी नहीं। हम दसवीं, बारहवीं, बीए,एमए, बीटेक करते हैं और डिग्रियां कागज में लपेटकर ‘उंदू’ (मैदानी क्षेत्र) रवाना हो जाते हैं। हम दिल्ली, चंडीगढ़,मुंबई से पहले गाडी़ नहीं रुकवाते। हम वर्कशॉप खोलने की तरफ नहीं सोचते, वेल्डिंग करने की नहीं सोचते, कारपेंटरी और चिनाई की तरफ भी रुझान नहीं रखते। छोटे-मोटे ऐसे कामों पर ध्यान दें तो पहाड़ में काम की कमी नहीं है। हमारी शहर प्रभावित मनोदशा का अंदाजा देखिए कि बैंड वाले बिजनौर और श्रीनगर से बुला रहे हैं, जबकि कुछ औजियों (वाद्य कलाकार) के लड़के नौकरियों के लिए देहरादून-दिल्ली की धूल फांक रहे हैं।
बहरहाल, इस कर्मठ बहन की सोच, निर्भीकता, संघर्ष, दक्षता, स्वाभिमान,दायित्व निर्वहन और ग्राहक सेवा भाव को उतनी बार प्रणाम करता हूं,जितनी बार सांस लेता हूं।

● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल । लेखक का संक्षिप्त परिचय : डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें..... dr. veerendra Bartwal , youth icon national award
● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल ।       लेखक का संक्षिप्त परिचय :   डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें….. 

मैं देहरादून आ रहा था। गाडी़ के एक टायर में हवा कम थी। पंक्चर की आशंका पर एक छोटे वर्कशॉप के आगे गाडी़ रोकी। वहाँ एक युवक और एक व्यक्ति बाइक को ठीक कर रहे थे। एक महिला एक ट्यूब पर पंक्चर ढूंढ़ रही थी। महिला कम व्यस्त दिखी,परंतु मैं निश्चित नहीं था कि वह वर्कशॉप में काम भी करती होगी। मैंने युवक से कहा-भुला (छोटे भाई) ! मेरी गाडी़ देख ले यार पहले।

मेरे शब्द सुनकर और जल्दबाजी वाली मेरी स्थिति भांप महिला ने ट्यूब वहीं फेंकी और एक हाथ में हवा मापक यंत्र तथा दूसरे में हवा भरने का पाइप पकड़ कर सीधे मेरी गाडी़ के पिचके टायर के पास आ गई। मेरी दृष्टि टायर से अधिक महिला के कार्य करने के तरीके पर केंद्रित हो गई। उसने फटाफट हवा भरने के बाद टायर का वाल्व और बाहरी परत चेक की और पांच मिनट में परिणाम दे दिया कि टायर पंक्चर की आपकी आशंका निर्मूल है। साथ ही अन्य टायरों पर भी हवा चेक की। किसी से अतिरिक्त हवा निकाली,किसी में भर दी। यह भी ताकीद किया कि आगे और पीछे के टायरों में न्यूनतम और अधिकतम हवा कितनी रहनी चाहिए। यही नहीं, डिक्की खुलवाकर स्टेपनी में भी हवा डाली, जिसके प्रति हवा भरने वाले और चालक प्रायः उदासीन रहते हैं। मैं न

● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल । लेखक का संक्षिप्त परिचय : डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें..... dr. veerendra Bartwal

केवल महिला की दक्षता पर नतमस्तक था,अपितु उसकी कर्तव्यपरायणता पर भी शीष नवा रहा था। मेरी गाडी़ में बैठे मेरे साथी प्राध्यापक भी इस घटना पर अत्यंत प्रभावित थे।

यह वाकया देवप्रयाग का है और सुखद आश्चर्य इसलिए कि पहाड़ की महिलाएं तो क्या पुरुष भी इस कार्य करने को राजी नहीं। हम दसवीं, बारहवीं, बीए,एमए, बीटेक करते हैं और डिग्रियां कागज में लपेटकर ‘उंदू’ (मैदानी क्षेत्र) रवाना हो जाते हैं। हम दिल्ली, चंडीगढ़,मुंबई से पहले गाडी़ नहीं रुकवाते। हम वर्कशॉप खोलने की तरफ नहीं सोचते, वेल्डिंग

● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल । लेखक का संक्षिप्त परिचय : डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें..... dr. veerendra Bartwal

करने की नहीं सोचते, कारपेंटरी और चिनाई की तरफ भी रुझान नहीं रखते। छोटे-मोटे ऐसे कामों पर ध्यान दें तो पहाड़ में काम की कमी नहीं है। हमारी शहर प्रभावित मनोदशा का अंदाजा देखिए कि बैंड वाले बिजनौर और श्रीनगर से बुला रहे हैं, जबकि कुछ औजियों (वाद्य कलाकार) के लड़के नौकरियों के लिए देहरादून-दिल्ली की धूल फांक रहे हैं।

● डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल । लेखक का संक्षिप्त परिचय : डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल नित नए-नए प्रसंग अपने शानदार रचनात्मक लेखों के मार्फ़त हम सबके सामने लाते हैं । उनके लेख हर वर्ग के पाठकों लिए प्रेरणा के स्रोत से कम नहीं हैं । डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल पूर्व में भिन्न-भिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रकारिता कर चुके हैं और वर्तमान में वह देवप्रयाग डिग्री कालेज में प्रवक्ता पद पर कार्यरत अपनी सेवा दे रहे हैं । हिंदी और संस्कृत के अलावा गढवाळी शब्दों पर जबरदस्त पकड़ है डॉ. वर्त्वाल की । उनकी इसी विद्वता के चलते उन्हें पूर्व में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है । आज पहाड़ की नारी के इस नए अवतार को डॉ. वीरेंद्र वर्त्वाल ने बहुत करीब से देखने, समझने के बाद आप और हमारे सामने अपने शानदार लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है । प्रेरणादायक स्टोरी आगे पढ़ें..... dr. veerendra Bartwal

बहरहाल, इस कर्मठ बहन की सोच, निर्भीकता, संघर्ष, दक्षता, स्वाभिमान,दायित्व निर्वहन और ग्राहक सेवा भाव को उतनी बार प्रणाम करता हूं,जितनी बार सांस लेता हूं।

-डा.वीरेंद्र बर्त्वाल, देहरादून, Dr. Veerendra Bartwal . Dehradun

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