Jagdamba prasad maithani . JP Maithani . Shashi bhushan Maithani Paras . DM Chamoli . Gopeshwar . Uttarakhandपेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? ◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए । .... सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।.... पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है । हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके । अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा । यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society " YiCF ") के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं । YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की । इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में "समौण इंसानियत की - गर्माहट रिश्तों की " मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है । उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है । और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है । अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है । मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान । अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए । बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है । शशि भूषण मैठाणी पारस Shashi Bhushan Maithani Paras 9756838527 7060214681

Youth icon yi media logo . Youth icon media . Shashi bhushan maithani paras

पेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ?

◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए ।

 

..सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे ।
प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।

 

गोपेश्वर, (चमोली). पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है ।

Jagdamba prasad maithani . JP Maithani . Shashi bhushan Maithani Paras . DM Chamoli . Gopeshwar . Uttarakhandपेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? ◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए । .... सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।.... पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है । हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके । अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा । यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society " YiCF ") के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं । YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की । इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में "समौण इंसानियत की - गर्माहट रिश्तों की " मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है । उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है । और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है । अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है । मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान । अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए । बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है । शशि भूषण मैठाणी पारस Shashi Bhushan Maithani Paras 9756838527 7060214681

हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके ।
अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा ।

Jagdamba prasad maithani . JP Maithani . Shashi bhushan Maithani Paras . DM Chamoli . Gopeshwar . Uttarakhandपेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? ◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए । .... सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।.... पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है । हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके । अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा । यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society " YiCF ") के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं । YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की । इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में "समौण इंसानियत की - गर्माहट रिश्तों की " मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है । उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है । और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है । अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है । मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान । अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए । बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है । शशि भूषण मैठाणी पारस Shashi Bhushan Maithani Paras 9756838527 7060214681

यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society ” YiCF “) के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं ।
YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की

Jagdamba prasad maithani . JP Maithani . Shashi bhushan Maithani Paras . DM Chamoli . Gopeshwar . Uttarakhandपेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? ◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए । .... सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।.... पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है । हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके । अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा । यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society " YiCF ") के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं । YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की । इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में "समौण इंसानियत की - गर्माहट रिश्तों की " मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है । उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है । और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है । अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है । मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान । अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए । बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है । शशि भूषण मैठाणी पारस Shashi Bhushan Maithani Paras 9756838527 7060214681

ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की ।

गोपेश्वर में आई हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने! 

इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला

Jagdamba prasad maithani . JP Maithani . Shashi bhushan Maithani Paras . DM Chamoli . Gopeshwar . Uttarakhandपेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? ◆ इस व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए । .... सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं ।.... पहाड़ चढ़ी मुहिम समौण इंसानियत की, गर्माहट रिश्तों की । देहरादून के बाद मुहिम रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ, गोपेश्वर तक पहुंची है । हालाँकि मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पहाड़ों में खुले आसमान के नीचे या बिना गर्म कपड़ों के रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है । लेकिन हमारा मकसद है कि जरूरतमंद एक हो या अनेक पीड़ा सबकी एक समान होती है, और जहाँ तक कोशिश हो ज्यादा ज्यादा जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाई जा सके । अगर दो सौ किलोमीटर दूर पहाड़ पर कोई एक भी जरूरतमंद परिवार है तो उसे भी मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा । यूथ आइकॉन क्रिएटिव फाउंडेशन सोसायटी ( Youth icon Creative Foundation Society " YiCF ") के तत्वावधान में अकेले रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद में तीन दिनों के भीतर 172 कम्बलें व 367 स्वेटर,जैकेट आदि पहनाए गए व बांटे गए हैं । YiCF की ओर से उन सभी का विशेष धन्यबाद जिन्होंने इस मुहिम को चमोली जिले से पहले व एकमात्र सहयोगी जगदम्बा प्रसाद मैठाणी समाजसेवी , ( Jagdamba Prasad Maithani ) का जिन्होंने हमारी मुहिम को अपनी संस्था की ओर से 30 गर्म कम्बलें भेंट की । साथ ही देवेंद्र रावत प्रेस क्लब अध्यक्ष ( Devendra Rawat ) का भी विशेष धन्यबाद कि जिन्होंने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में हमें मदद की । इस दरमियान गोपेश्वर जिला मुख्यालय में एक बेहद ही हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई । जिसे जिला प्रशासन की घोर लापरवाही कहा जा सकता है । बताते चलें कि हमारे लिए यह पहला मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में "समौण इंसानियत की - गर्माहट रिश्तों की " मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है । उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है । और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है । अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है । मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान । अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे । प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी । दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए । बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है । शशि भूषण मैठाणी पारस Shashi Bhushan Maithani Paras 9756838527 7060214681

मौका था जब हमें पहली बार किसी इंसान की लिए सार्वजनिक मूत्रालय में “समौण इंसानियत की – गर्माहट रिश्तों की ” मुहिम के तहत गर्म कपड़े पहनाने पड़े । यह दृश्य मानवता को शर्मशार करने वाला रहा । अफशोष तो इस बात का था कि आखिर तीन वर्षों से जिला प्रशासन कैसे यह सब देखकर खामोश बैठा हुआ है ।
उक्त व्यक्ति जिसकी उम्र लगभग 50 से 52 साल के बीच की होगी वह उस पेशाबघर में सोता है जहां किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए एक सेकंड के लिए ठहरना या सांस लेना मुश्किल हो जाता है । सोचिए , वहां दिनभर भिन्न-भिन्न लोगों के पेशाब से गीली हुई टाइलों पर कुछ कपड़े डालकर ये इंसान कैसे रातें बिता रहा है ।

 

हम लोगों से अपील करते हैं कि जब तक इस व्यक्ति के लिए कोई ठोस इंतजामात नहीं किये जाते हैं तो तब तक आप सब भी सामाजिकता दर्शाएं और इस पेशाबघर में पेशाब न करें । नगर पालिका से अनुरोध कि कृपया इस मूत्रालय की साफ सफाई की जाए यहां बिलीचिंग पाउडर । व अन्य दवाइयों का छिड़काव कर इसकी एक तरफ की दीवार बंद करके लोगों को यहां पेशाब करने से रोका जाए । एक इंसान की सच्चि सेवा से बढ़कर परोपकार और कुछ नहीं हो सकता है । उम्मीद करता हूँ कि चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया भी तत्काल कुछ कदम उठाएंगी जो इंसानियत के लिए एक मिसाल साबित होगा । 

और दलील दी जा रही है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है ।
अब सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पागल है और वह मल मूत्र त्यागने वाले गंदे स्थानों पर रहने को मजबूर है तो क्या स्थानीय प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है ।
मैं जब इस व्यक्ति के पास गया तो मुझे वह सामान्य सा व्यक्ति लगा जो एक तंदुरुस्त इंसान है बातों को सुनता है समझता है और बोलता भी है । और स्वाभिमानी भी है । कुछ चीज देने पर लेने से पहले यह कहते हुए मना करता है कि मैं भिखारी नहीं हूँ । ले जाओ अपना ये सामान ।

अब सोचिए जो इंसान इतना सुन, बोल व समझ लेता है तो उसे आप किस दर्जे का मानसिक रोगी समझेंगे ।

प्रशासन को चाहिए था कि वह इस पर नजर रखता । खुफिया विभाग इसकी गहनता से पड़ताल करता और इस व्यक्ति के सम्बंध जानकारी जुटाता कि यह भारत के किस प्रान्त का है । बोली भाषा से भी मालूम किया जा सकता था । मेरा अपना मत है कि जिला प्रशासन को उक्त व्यक्ति को केदारनाथ आपदा में लापता हुए लोगों के साथ भी जोड़कर देखना चाहिए था । इसका DNA जांच कराई जानी चाहिए थी ।

दूसरी ओर ऐसे लोगों पर संदिग्ध निगाहें भी रखनी जरूरी है । पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कैसे ऐसे लोग जिनकी बोली भाषा पर प्रान्ती हो वो इतनी दूर आकर इस तरह का जीवन व्यतीत करने लगते हैं । कभी कभी इस दृष्टि से भी सोचा जाना चाहिए कि कुछ आपराधिक मामलों में संलिप्तता के चलते ऐसे लोग व्यवहार बदलकर हिमालय में छुपने नहीं आ गए ।

बहरहाल यह सब तो प्रशासनिक मसले जिन पर उन्हें हर क्षेत्र में मौजूद लोगों पर नजर रखनी चाहिए । परन्तु यहां संवाल इंसानियत का है । और हमने अपना फर्ज निभाया है । और एक मामूली सी मदद दी है । हमसे पहले भी समाजसेवी अंकोला पुरोहित और उनकी टीम बराबर इस व्यक्ति को हर संभव मदद पहुंचाते आए हैं । प्रेसक्लब अध्यक्ष देवेन्द्र रावत इसे भोजन मुहैय्या कराते हैं । लेकिन सवाल फिर भी इस लिए खड़ा है कि चमोली जिला प्रशासन अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है । जबकि यह मामला DM Chamoli के बंगले के ठीक नाक के नीचे का है । अगर अचानक से इस व्यक्ति मौत हो जाएगी तो तुरन्त सुर्खियां बनेंगी कि ठण्ड से व्यक्ति की मौत सरकार के दावे फेल । अब ऐसे मामलों में सरकार नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी आवश्यक है ।

 

शशि भूषण मैठाणी पारस
Shashi Bhushan Maithani Paras
9756838527
7060214681

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2 thoughts on “पेशाबघर में सो रहा है इंसान.. ! सरकार जिम्मेदार या प्रशासन ! अगर अभी इस व्यक्ति के साथ घटना घट जाए तो किसकी जिम्मेदारी होगी ? कहीं केदारनाथ आपदा में लापता व्यक्ति तो नही है ये ?”
  1. मैठाणी जी आपका प्रयास सदैव ही सम्सस्थ प्राणियों के हित के लिये होता है। ईस्वर आपको ओर शक्ति प्रदान करे और दुगनी गति से अपने अभियान को जारी रख सके।

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