satpal maharaj । पर्यटन मंत्री youth icon Yi Media

Logo Youth icon Yi National Media HindiReligious pilgrimage in Uttarakhand will develop on the lines of Sri Lanka : पर्वतीय अंचल की वैभवशाली संस्कृति और लोक परम्पराओं  से जुड़ेगी  अब उत्तराखण्ड पर्यटन की तस्वीर । 

* श्रीलंका की तर्ज पर विकसित होगा उत्तराखण्ड में धार्मिक तीर्थाटन । 

* पहाड़ का इतिहास पहाड़ के गीतों में ही ज्यादा पुष्ट होता है, सरकार रिकार्ड करवाएगी बुजुर्गों के गीत । 

By : Shashi Bhushan Maithani ‘Paras’

देवभूमि उत्तराखण्ड जो कि अपनी नैसर्गिक छ्टा के लिए दुनियांभर में मसहूर है । गढ़वाल हो या कुमायूं यहां के हर क्षेत्र का अपना एक समृद्ध इतिहास है । लेकिन जिस गति से इस क्षेत्र के विकास के लिए कार्य हमारी सरकारों को करना चाहिए था वह दरअसल अभी तक हुआ ही नहीं है । सूबे के भद्र-नेताजन विकास से ज्यादा यहाँ सरकार बनाने या गिराने की जुगत में ही देखे गए जिस कारण जनता का भी धीरे-धीरे माननीयों के दावे और वादों से विश्वास उखड़ता चला गया ।  राज्य आंदोलन के वक़्त हर आंदोलनकारी यही कहता था कि उत्तराखण्ड का पर्यटन ही अपने आप में हमारी सबसे मजबूत आर्थिकी का श्रोत होगा लेकिन जैसे ही राज्य बना तो यहां पर्यटन को पीछे  और शराब को आगे कर दिया गया ।  पर्यटकों की व्यवस्था राम भरोशे छोड़ दी गई । 2013 की केदारनाथ त्रासदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हम सबके सामने हैं । यह अपने आप में शायद पहला ऐसा राज्य होगा जिसके पास अपने यहां आने वाले पर्यटकों का कभी भी सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं रहा है । यह भी सच है कि उत्तराखण्ड में बढ़ती पर्यटकों की आमद किसी भी सरकार की आकर्षक योजना का कारण नहीं जिसे अभी तक की सरकारें अपनी  उपलब्धि मान बैठे, बल्कि यहां इस संख्या को बढ़ाने में मीडिया व वर्तमान में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है । बाकी सरकार की व्यवस्थाएँ तो आज भी वही हैं जो उत्तरप्रदेश के समय से चली आ रही हैं । 

लेकिन अब वर्तमान भाजपा सरकार में सूबे का पर्यटन व संस्कृति जैसा महत्वपूर्ण  महकमा धर्म और अध्यात्म से जुड़े खास सतपाल महाराज को मिला है । तो ऐसे में अब लोगों को भी उम्मीद है कि शायद महाराज के धार्मिक ज्ञान व आध्यात्मिक ऊर्जा का लाभ इस राज्य के धार्मिक तीर्थाटन को मजबूती देने की दिशा में  मिल सकेगा । लेकिन क्या  वाकही पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज अबकी बार कुछ ऐसा चमत्कार कर जाएंगे जो अभी तक की सरकारों में कोई नहीं कर पाया ? क्या महाराज जन भावनाओं में खरे उतरेंगे ? पर्यटन व तीर्थाटन नीति में ऐसा क्या करेंगे महाराज कि जिससे बदल जाएगी तस्वीर आइये आगे उन्हीं से जानते हैं ……

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सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखण्ड

बातचीत में उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि, उत्तराखंड सरकार की योजना है कि आने वाले दिनों में उत्तराखण्ड देश और दुनियाँ में धार्मिक तीर्थांटन के अलावा पर्यटन के क्षेत्र में लोगों की पहली पसंद बने इसके लिए सूबे का पर्यटन महकमा जोरदार कसरत में भी जुट गया है । और स्वयं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कमान संभाली हुई है । महाराज का कहना है कि उत्तराखण्ड के गढ़वाल और कुमायूं मण्डल के उन सभी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को चिन्हित किए जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है जो एतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं । महाराज ने बताया कि उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं । कहा कि यह देवताओं की भूमि है यहाँ के कण-कण में धार्मिक महत्ता छुपी हुई है, जिसे देश और दुनियाँ के सामने लाने की जरूरत है । श्रीलंका का उदाहरण देते हुए उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि श्रीलंका ने रावण से ज्यादा राम, सीता और हनुमान के चिन्हों को अपने देश में संरक्षित और सुरक्षित किया है जिस कारण आज श्रीलंका दुनियाँभर के लोगों के लिए दर्शनीय स्थल बना हुआ है । श्रीलंका में संरक्षित व सुरक्षित रामायण काल का इतिहास सिर्फ हिंदुओं की आस्था के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ के पर्यटकों व शोधकर्ताओं के लिए भी हर दिन कौतूहल व रोचक विषय बना हुआ है । दुनियाँभर से इतिहासकार व शोधकर्ता बड़ी संख्या में श्रीलंका में भारत के इस समृद्ध इतिहास को जानने समझने व नई-नई जानकारियां जुटाने पहुँचते हैं । जिसका सीधा लाभ श्रीलंका को भारी राजस्व के रूप में होता है । और इसी तर्ज पर हमें अकेले उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में द्वापर और त्रेता युग के कई निशान व जीवंत कहानियाँ मिलती हैं जिन्हें संरक्षित करने के

Religious pilgrimage in Uttarakhand will develop on the lines of Sri Lanka : पर्वतीय अंचल की वैभवशाली संस्कृति और लोक परम्पराओं  से जुड़ेगी  अब उत्तराखण्ड पर्यटन की तस्वीर । 
पर्वतीय अंचल की वैभवशाली संस्कृति और लोक परम्पराओं  से जुड़ेगी  अब उत्तराखण्ड पर्यटन की तस्वीर महाराज 

अलावा लिपिबद्ध करके दुनियाँ के सामने लाने की जरूरत है । महाराज ने आगे बातचीत में कहा कि उत्तराखण्ड में  लाखामन्डल, भीम का चूल्हा, द्रोपदी की समाधी, रावण की तपस्थली वैराशकुंड, पातालभुवनेश्वरी, मुंडकटिया गणेश, दानबीर कर्ण की तपस्थली, न्याय के देवता गोलू और लाटू देवता , कंडार देवता,  एक मात्र सीता माता मंदिर, अल्मोड़ा में लखुडियार की रॉक पेंटिंग, डांडा नागराजा इत्यादि अनेकों असंख्य दर्शनीय व रमणीक स्थल हैं जिन पर हम पूरी तरह से काम कर रहे हैं, और आने वाले समय में इसके सफल परिणाम लोगों के सामने भी होंगे ।

महाराज ने बताया कि वह स्वयं विभिन्न स्थानों पर जा रहे हैं स्थलीय निरीक्षण कर स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है । राज्य के ग्रामीण अंचलों के  वृद्ध पुरुष व महिलाओं के लोक पारंपरिक गीतों को भी रिकार्ड करवाने की योजना है क्योंकि पहाड़ का इतिहास पहाड़ के गीतों में ही छुपा है और गीतों से ही ज्यादा पुष्ट भी होता है । हमारी सरकार पर्वतीय अंचल के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक गीतों को संरक्षित करने की दिशा में भी प्रमुखता से कार्य योजना तैयार कर रही है ।  हमें अपनी इस जीवंत धरोहर को आज के इस दौर में संरक्षित करने की सख्त जरूरत है । महाराज ने आगे बताया कि यह भी एक चिंता का विषय है कि आने वाली नई पीढ़ी आज के इस युग में बहुत तेजी से अपनी बोली भाषा से दूर छिटक रही है । इसलिए मै अभी एक यह योजना भी शीघ्र आरंभ करने जा रहा हूँ कि जिसमें दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से वहीं के मूल युवाओं के मार्फत उनके आसपास के बुजुर्गों के द्वारा गाए जाने वाले लोक पारंपरिक गीतों को वीडियो रिकार्डिंग के मार्फत मंगाया जाएगा । इस कार्य में सहयोग करने वाले युवाओं को सम्मान पत्र व पुरष्कार भी दिया जाएगा । मुझे लगता है कि ऐसा करने से युवा पीढ़ी अपनी बोली भाषा की ओर बढ़ेगी और दूसरी ओर दूरस्थ क्षेत्रों से बड़ी संख्या में हमारे रिकार्ड के लिए गीतों में छुपा पहाड़ का इतिहास भी एकत्रित हो सकेगा जो आने वाले समय में शोधकर्ताओं के लिए भी शोध का विषय होगा ।

तो यह तो थी पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मन की बात । बहरहाल  मुझे लगता है कि बातचीत में  जो दो महत्वपूर्ण विंदु पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताए हैं अगर आने वाले दिनों में उन्हीं पर भी ईमानदारी से कार्य किया जाय तो निसंदेह उत्तराखंड में पर्यटन व तीर्थाटन के विकास में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम भी करेंगा बशर्ते कि यह भी पूर्व की भांति  केवल  बयान मात्र बनकर न रह जाय ।

  • शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’ 9756838527 , 7060214681 Logo Youth icon Yi National Media Hindi

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One thought on “Religious pilgrimage in Uttarakhand will develop on the lines of Sri Lanka : पर्वतीय अंचल की वैभवशाली संस्कृति और लोक परम्पराओं  से जुड़ेगी  अब उत्तराखण्ड पर्यटन की तस्वीर । ”
  1. अच्छा प्रयास है अगर इमानदारी से और प्रभावी रूप से क्र्यांवान्वित किया जाता है तो .

    मेरे एक मित्र है उन्होंने इस विषय पर पिछले आठ दश सालों में काफी काम किया है उनसे इस मुद्दे पर क्या क्या संभावनाए है इस पर बड़ी चर्चा होती रही है, चलो अब माननीय मंत्री जी ने ही सही एक शुरुआत तो की.

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