जब से आर्मी में था तब से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। पिछले साल से इसी एटीएम के पास गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। गरीब बच्चों को मंजिल तक पहुंचाना ही मेरा मकसद है। में अब खास तौर से गरीब लड़कियों पर फोकस कर रहा हूं। बेटियों को दूसरे घर जाना है इसलिए उनको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की तरह वे सिर्फ गरीब बेटियों को पढ़ाने पर फोकस कर रहा हूं। गरीब बच्चों को पढ़ाना और उनकी हेल्प करना उनके लिए जुनून बन गया है।   विजेन्द्र सिंह, सिक्योरिटी गार्ड

Logo Youth icon Yi National Media HindiVijendra is doing excellent wor:k : आखिर क्यों बना हुआ है विजेन्द्र लोगों का चहेता ? गुद्ड़ी के लालों के गार्ड अंकल की अनूठी कहानी …पढ़ने के लिए अभी क्लिक करें ।

0- एटीएम के पास क्लास लगाकर गरीब बच्चों को पढ़ा रहा सिक्योरिटी गार्ड ।

0- रोजाना 2 घंटे बच्चों की क्लास लगाने के अलावा पढ़ने की सामग्री भी करा रहे उपलब्ध । 

RAKESH BIJALWAN

यूथ आइकॉन Yi क्रिएटिब मीडिया  देहरादून ।  अपनी लिए तो सभी जीते हैं लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपना पूरा जीवन दूसरों के जीवन को संवारने, उसे आकार देने में समर्पित कर देते हैं। ये लोग सिर्फ अपने परिवार, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बन जाते हैं। इनके जीवन में कहने के लिए इतना कुछ होता है कि कहानी सिर्फ एक-दो पन्नों में नहीं सिमटती। बल्कि एक किताब में भी इनके जीवन के कई अहम चैप्टर समा नहीं पाते। ऐसी ही एक शख्सियत हैं देहरादून के बच्चों के प्यारे गार्ड अंकल विजेन्द्र सिंह। विजेन्द्र कहने को तो एक सिक्योरिटी गार्ड हैं लेकिन अपने जुनून से यह हम सब के बीच अलग जगह रखते हैं। इन दिनों यह गार्ड साहब सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इनके बारे में जानकर आप भी इन्हें सलाम करेंगे। इन दिनों उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर को ज्यादा से ज्यादा शेयर किया जा रहा है।

Vijendra is doing excellent wor:k : आखिर क्यों बना हुआ है विजेन्द्र लोगों का चहेता ? गुद्ड़ी के लालों के गार्ड अंकल की अनूठी कहानी
Excellent wor:k :  गुद्ड़ी के लालों के गार्ड अंकल की अनूठी कहानी । 

इस तस्वीर में एक सिक्योरिटी गार्ड गरीब बच्चों को पढ़ाते हुए दिख रहा है। इस तस्वीर के पीछे की कहानी जानकर आप भी कहेंगे यही हैं हम सबके यूथ आइकाॅन। पेश है गुद्ड़ी के लालों के गार्ड अंकल की अनूठी कहानी।

आपने समाज सेवा के कई तरीके देखें होंगे, लकिन देहरादून में पूर्व फौजी एक ऐसी मिसाल कायम कर रहे है जो सरहनीय है। गरीब बच्चों के प्यारे गार्ड अंकल का नाम है विजेन्द्र सिंह। 65 वर्षीय विजेन्द्र सिंह वर्तमान में इलाहाबाद बैंक के आईएसबीटी ब्रांच पर सिक्योरिटी गार्ड हैं। विजेन्द्र सिंह देहरादून के पटेल नगर में रहते हैं। बिजेंद्र सिंह पहले

जब से आर्मी में था तब से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। पिछले साल से इसी एटीएम के पास गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। गरीब बच्चों को मंजिल तक पहुंचाना ही मेरा मकसद है। में अब खास तौर से गरीब लड़कियों पर फोकस कर रहा हूं। बेटियों को दूसरे घर जाना है इसलिए उनको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की तरह वे सिर्फ गरीब बेटियों को पढ़ाने पर फोकस कर रहा हूं। गरीब बच्चों को पढ़ाना और उनकी हेल्प करना उनके लिए जुनून बन गया है।   विजेन्द्र सिंह, सिक्योरिटी गार्ड
जब से आर्मी में था तब से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। पिछले साल से इसी एटीएम के पास गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा हूं। गरीब बच्चों को मंजिल तक पहुंचाना ही मेरा मकसद है। में अब खास तौर से गरीब लड़कियों पर फोकस कर रहा हूं। बेटियों को दूसरे घर जाना है इसलिए उनको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की तरह वे सिर्फ गरीब बेटियों को पढ़ाने पर फोकस कर रहा हूं। गरीब बच्चों को पढ़ाना और उनकी हेल्प करना उनके लिए जुनून बन गया है।
 
विजेन्द्र सिंह, सिक्योरिटी गार्ड

गढ़वाल राइफल में थे वहां से रिटायर होने के बाद उन्होने सिक्योरिटी गार्ड की दूसरी नौकरी ज्वाइन की। विजेन्द्र देहरादून के पटेलनगर के रहने वाले हैं और पिछले कई सालों से इसी तरह गरीब बच्चों की हेल्प कर रहे हैं। विजेन्द्र जब बैंक के माजरा स्थित एटीएम में थे तो हर रोज रात को एटीएम की लाइट के नीचे कई बच्चे इकठ्ठा होते है और कॉपी किताबे लेकर लाइन से बैठ जाते है और वह उनको पढ़ाने का काम करते है।

विजेन्द्र वर्तमान में इलाबाद बैंक के आईएसबीटी ब्रांच पर सिक्योरिटी गार्ड हैं। जहां वह हर दिन करीब 20 बच्चों को एटीएम के पास खाली जगह पर बच्चों को 2 घंटे तक पढ़ाते हैं। जिसमें अधिकतर गरीब बच्चों को ही पढ़ाया जाता है। उनके पास ब्राह्मणवाला, मेंहूंवाला, शिमला बाईपास, निरंजनपुर आदि कई इलाकों से गरीब बच्चे रोजाना पढ़ने आते हैं। विजेन्द्र हर बच्चे को गेहूं और गुड़ भी देते हैं। विजेन्द्र रोजाना शाम के वक्त बच्चों की क्लास शुरू करते हैं। जिसमें बच्चों को गणित और सामान्य विषय के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी सिखाया जाता है। इस के अलावा विजेन्द्र के इस स्कूल में महीने में प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं। जिसमें गरीब बच्चों से केक कटवाया जाता है और खाना पीना भी होता है। इसके अलावा बच्चों के बीच संडे में डांस कांम्प्टीशन भी कराया जाता है। विजेन्द्र बताते हैं कि गरीब बच्चों को पढ़ाने का जूनून उनकी लाइफ का एक मात्र उद्देश्य रह गया है। जिसके लिए वे अब परिवार और रिश्तेदारों से तक भिड़ जाते हैं। बिजेंद्र सिंह रात को इन बच्चों को पढ़ाने के अलावा सुबह को भी बच्चों को पढ़ाते है। सबसे खास बात ये हैं कि गार्ड की अपनी थोड़ी से सैलरी में से विजेन्द्र सिंह गरीब बच्चों को कॉपी किताबे भी दिलाते है। दरअसल बच्चों को पढ़ाने, उनकी किताबें और अन्य हेल्प करने में रोजाना 200 रुपए तक खर्चा आ जाता है। जिससे घर परिवार चलाने और बच्चों की हेल्प करने में उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विजेंद्र सिंह ने जहां अपने ताह उम्र देश की सेवा में लगाई। वहीं, अब विजेंद्र सिंह जो काम कर रहे है उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है।
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