Logo Youth icon Yi National Media HindiWhere is missing : बड़ी खबर ….उत्तराखंड से भरतु की ब्यारी हुई गुम…! 

* कहां गई भरतु की ब्यारी…बुढे, जवान सब परेशान !  

* रिख उठै की ली ग्या या फिर बाघ ल मार द्या ! 

देहरादून, (यूथ आइकाॅन) Youth icon Yi Media. 
छवटा भुला भरतु… तेरी ब्यारी क्य ब्यन तब। अरे छवटा भुला भरतु तेरी ब्यारी क्य ब्यन तब, अरे बड़ा भैजी भरतु.. भाभी टनाटन… अरे बड़ा भैजी भरतु… भाभी टनाटन…. जिस गांव में छोटे-छोटे बड़े हर किसी की जुवान पर भरतु की ब्यारी का नाम था। पूरे गांव में खुशनुमा माहौल था। भरतु की ब्यारी के रूप, गुण, व्यवहार का हर कोई कायल था। आज पूरा गांव हैरान और परेशान हैं। सब एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि अरे तिल भी देखी भरतु की ब्यारी…. भरतु का रो-रो के बुरा हाल है। किसी को नहीं पता भरतु की ब्यारी कहां गई… कोई बोल रहा है जंगल की तरफ जाते देखा….कोई बोल रहा है पंदेर में पानी के लिए जाते हुए देखा…कोई कुछ कोई कुछ…गांव की बुढी बुजुर्ग महिलाएं आपस में बात कर रहीं हैं कि अरे बड़ी सुंदर छै व… रिख उठै कि ली ग्या हवलु….तो कोई कह रहा है अरे बाघ ल मार द्या हवलि… राति भी भैर भितर कनी रैंद छै…..जितनी मुंह उतनी ही बातें। पूरे गांव में हडकंप मचा हुआ है। गई कहां भरतु की व्यारी……
shashi bhushan maithani paras editor and director Youth icon yi national media
Shashi Bhushan Maithani Paras

गांव के बुर्जगों ने सलाह दी कि नरू पटवारी जी को बुलाओ…. पटवारी जी आये… पूछताछ करने से पहले ही भरतु को लगे सलाह देने कि क्या जरूरत थी गांव आने की….. तुम्हें तो पता ही है कि यहां गांव में लोग कम जानवर ज्यादा है…… पटवारी जी ने मामला फजेतू थानेदार जी को समझाया और बताया कि भरतु भाई की देहरादून में एक खांटी पत्रकार के साथ उठना बैठना है। थानेदार सहाब ने मामले की गंभीरता को देख भरतु की व्यारी का फोन सर्विलांस पर लगाया… लेकिन जब फोन ट्रैक होना शुरू हुआ तो सारी पुलिस हैरान परेशान….कभी लोकेशन लंदन मिले तो कभी सउदी अरब… कभी कनाडा तो कभी दिल्ली, बैंगलूर कभी मुम्बई तो कभी पौड़ी, कभी रूद्रप्रयाग…..कभी देहरादून… पुलिस हैरान यह क्या माजरा है लोकेशन पूरी दुनिया में……….आखिर यह भरतु की ब्यारी है या फिर हवा-हवाई… कभी यहां कभी वहां…………भरतु ने अपने दुखड़ा अपने प्रिय पत्रकार जी को सुनाया…..भैजी तुमरी भाभी चोरी हवैगे… कुछ कारा भैजी पत्रकार जी ने पुलिस अधिकारियों को फोन लगाया…..अधिकारियों ने कहा महोदय हम भी क्या करें… भरतु की ब्यारी की लोकेशन कभी यहां कभी वहां मिल रही है। हम क्या करें सहाब….निराश पत्रकार महोदय ने भरतु को फोन लगाया और कहा भुला अब कुछ नहीं हो सकता अब तो तेरी ब्यारी देश और दुनिया की हो गई। किस-किस के घर जाकर खोजें। जब मैने तुम्हें वक्त रहते समझाया था लेकिन तुमने उस समय मेरी एक न सुनी, अब रो के क्या फायदा…अब मैं भी कुछ नहीं कर सकता…….

Naval Khali नवल खाली, युवा लेखक/ कहानीकार
धरमु ,वीरू, धीरू और भरतु सोशियल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे !!! जो भी मेसेज अच्छा लगता था ,उसको फट से कॉपी करके अपना नाम एड करके पोस्ट करके वाहवाही लूटते थे !!!
आजकल पलायन विषय पर वो सोशियल मीडिया के कोने कोने से इससे सम्बन्धित विषय को टपाकर ,अपना नाम जोड़कर पोस्ट करते थे !!! जब ये कुँवारे थे तो इन्होंने पड़ोसी की गाड़ी और मकान को अपना बताकर गर्लफ्रेंड को शादी का झांसा भी दिया था !!! पर जल्द ही पोल खुलने से ऐसा नही कर पाए !!!
जब इनकी टपाई गई पोस्ट पर लोगो के शाबासी के कमेंट आते तो …शुक्रिया और आभार लिखकर फूलकर कुप्पा हो जाते है !!!
सन्दर्भ- मित्रों मैं ये नही कहता कि मैं बहुत अच्छा लिख्वार (लेखक टाइप) हूँ !! पर हाँ जो लिखता हूँ दिल से लिखता हूँ , और मेरी कहानियाँ ,मेरे लिए मेरे बच्चे की तरह हैं ,जिनको कि मैं शुरुवाती पंक्ति से अंत तक शब्दो का पोषण देता हूँ !!! कुछ मित्र कॉपी करके उसमें से मेरा नाम हटाकर ,अपना नाम जोड़ देते हैं जोकि थोड़ा सा pinch होता है , क्योंकि एक लेखक की पूँजी उसकी कहानियों में छपा उसका नाम और उसकी पठनीयता होती है !!! मित्रों इसी से आगे कुछ लिखने की भी प्रेरणा मिलती है !!! धरमु ,वीरू, धीरू और भरतु को अगर मेरी बात बुरी लगी हो तो कृपया इस पोस्ट को भी कॉपी करने की कृपा करें !!!!
नवल खाली, युवा लेखक/ कहानीकार

आप भी हो गए न हैरान और परेशान…    दरसअल यह पूरा मामला जुड़ा हुआ है मेरे साथी नवल खाली के किस्से-कहानियों में से एक भरतु की ब्वारी से। उत्तराखंड के लोकप्रिय युवा ब्यंगकार और लेखक नवल खाली की के हालिया ब्यंग भरतु की ब्वारी ने लोकप्रियता के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। इसका फायदा खबरों, किस्से, कहानियों के कुछ चोरों ने उठाया और नवल की कहानी को अपने नाम से सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे को टैग करने लगे। आलम यह हुआ कि सौशल मीडिया के माध्यम से उनकी यह कहानी देश और दुनिया के लोगों तक पहुंच गई। लेकिन पूरी कहानी में कहीं नवल खाली के नाम का उल्लेख तक नहीं। लोगों को पता ही नहीं कि जिस कहानी को वह बड़े चाव से पढ़ रहे हैं और भेजने वाले को शबासी दे रहे हैं उसका असली लेखक असल में उत्तराखंड में रहने वाले युवा ब्यंगकार नवल खाली हैं। नवल को मैने बहुत पहले ही सलाह दी थी कि वह बहुत अच्छा लिखते हैं और उन्हें सर्तक भी रहना चाहिए क्योंकि बहुत से चोर टाइप के उनकी कहानियों को चुरा लेंगे और अपने नाम से प्रचारित करेंगे, लेकिन नवल ने मेरी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, आज वही हुआ जो मैने काॅफी पहले उन्हें कह दिया था। अब नवल जरूर सोच रहें होंगे कि मैठाणी भाई ने विल्कुल सही कहा था। खैर चोरों के बहाने इतना जरूर हुआ कि नवल की प्रतिभा सभी के सामने आ गई। आप भी पढ़िए नवल की सबसे लोकप्रिय रचना भरतु की ब्वारी। 

भरतू की ब्वारी (काल्पनिक)

भरतु की ब्वारी -पार्ट-01

भरतु की ब्वारी (बीबी) आजकल अपने गांव के नजदीकी कस्बे में एक टू रूम सेट ढूंढ रही है , एक महिला ने पूछा भुल्ली तुम्हारा गाँव तो नजदीक ही है ,फिर यहाँ पर कमरा ढूंढ रही हो ??? भरतु की ब्वारी कहने लगी …. दीदी बच्चो की एजुकेशन भी कितनी जरूरी है ,आपको तो पता ही है !!! महिला ने पूछा ?? कितने बच्चे हैं भुल्ली तुम्हारे ??? भरतु की बीबी बोली –अभी तो नही हैं पर आजकल पहले से ही इंतज़ाम करना पड़ता है दीदी !!! आपको तो पता ही है कितना रश है आजकल !!!
भरतु जम्बू में आये दिन आंतकवादी सर्च ऑपरेशन में जूझ रहा था और ब्वारी आने वाले भविष्य के लिए नजदीकी कस्बे में कमरा सर्च कर रही थी !!!
 क्योंकि जिस दिन मायके से विदा हुई , उसी दिन माँ ने उसके कान में फुसफुसाते हुए ये गुरु मंत्र दे दिया था कि गा नही रखा है , यदि बच्चो का भविष्य चाहती है तो नजदीकी कस्बे में फिलहाल सेटल हो जाना और बाद में देहरादून !!! 
आखिरकार कमरा मिल गया !! सास ससुर के लिए भी आज ये गौरव का विषय था कि उनका भी नजदीकी शहर में टू रूम सेट है , क्योंकि अगल बगल के सभी लोगों की ब्वॉरिया भी नजदीकी शहर में सेटल हो चुकी  में भरतु का पड़ोसी राजु जोकि दिल्ली में प्राइवेट नौकरी में दस बारह हजार कमाता था ,अब उसकी बीबी ने भी घुसस्याट(जिद) गाड (निकाल) रखी थी कि नजदीकी कस्बे में रूम लेना है , सबके बच्चे अंग्रेजी में च्वां च्वां हो रखे हैं और हमारे बच्चे अभी भी ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार में ही अटके हैं !! राजू बेचारे को भी मजबूरी में रूम सेटल करना पड़ा !!! अब दोनों की बीबियाँ एक साथ बैठकर स्टार टीवी के सीरियल देख रही हैं , कभी स्वेटर के फंदे घटा रही हैं कभी बढा रही हैं !!! सुबह। उठकर पराग दूध की थैली लाकर ,बच्चो को हेल्दी बना रही हैं !!! गाँव न जाने के लिए , बच्चो का एक्स्ट्रा होमवर्क बताकर बहाना बना रही हैं !!! 
इधर भरतु और राजू अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं और हर महीने कम खा कर , पैसे बचाकर गाँव छोड़ चुके  बच्चो के लिए देहरादून में आसान किस्तों में घर बनाने का सपना सजा रहे हैं !!!!जबकि गाँव मे फोर फर्स्ट क्लास गुरुजी — नेपाली ओर बिहारियों के ग्यारह बच्चो को पढा रहे हैं ,पर गांव वाले सरकारी स्कूलों पर विश्वास नही जता रहे हैं !!! क्योंकि सरकारी स्कूलों के गुरुजन भी अपने बच्चो को प्राइवेट में ही पढ़ा रहे हैं !!!
इस प्रकार पलायन की दिशा में गांव से मूवमेंट नजदीकी कस्बो में बढ़ रहा है और धीरे धीरे एजुकेशन के बहाने ,गाँव से परिवारों के जत्थे देहरादून की जगमगाती रोशनी की तरफ बढ़ रहे हैं !!! अब देखना यह है कि देहरादून क्या इतना ब्रह्द है जोकि पूरा पहाड़ उसमे समा जाय?? 
या एक बड़ी जनसँख्या का एक ही जगह एकत्रित होना किसी खतरे का संकेत है ????

भरतु की ब्वारी- पार्ट-2 

आजकल भरतु की ब्वारी गर्मियों की छुट्टियों में दो चार दिन के लिए गाँव जा रखी थी !!! बच्चो को बता रही थी कि ३.बेटा ज्यादा गढ़वाली के वर्ड यूज मत करो , तुम्हारी टोन खराब हो जाएगी !! चाचा को अंकल बोलो , चाची को आंटी !!! आजकल गाँव थोड़ा गुलजार सा लग रहा था , ज्यादातर लोग देवता के डर से ,देवता को खुश करने देवता पूजाई में आये थे !!! कुछ पर गाँव की पुरानी ,एडी-आछरी, और छौल लगा था तो उसकी पूजाई भी जरूरी थी !!! गाँव के बच्चे ,शहरी बच्चो के कपड़ों ,भाषा और थोड़ा सा गोरेपन से प्रभावित नजर आ रहे थे !! हालांकि वो भी उनको फुल टक्कर दे रहे थे !! गाँव की महिलाएं भी शहरी महिलाओ को देखकर मन ही मन सोच भी रही थी कि ऐसी किस्मत हमारी कहाँ ?? शहरी महिलाओ के मेकअप और पहनावे से खासी प्रभावित हुई जा रही थी !!! पर शायद उनको ये भान नही था कि यहाँ गाँव का पूरा जहाँ उनका अपना था , पर शहर में दो चार कमरे की चारदीवारी ,और टीवी के अलावा कुछ भी अपना नही !!! शहरी मर्द लोग , कभी टिमरू ढूंढ रहे थे ,कभी तिमले, कभी बेड़ू ,कही से काखडी ,कही से मुंगरी और इन चीजों के साथ सेल्फी खींचकर फेसबुक पर मेरा गांव पोस्ट करके खुद को तसल्ली दे रहे थे !!!! 

आखिरकार छुट्टियाँ खत्म हो गयी ,भरतु की ब्वारी ने धारे पर खड़ी अन्य महिलाओं से कहा दीदी, दो चार दिन तो गांव में ठीक है ,पर अब हमारे बस का नही भई , ज्यादा दिन गाँव मे रहना , देखो न यहां के पानी से आजकल मेरे हाथ ,पाँव भी काले हो गए और बालों में भी रुशी हो गयी !!! तुम लोग पता नि कैसे रहते होंगे ?? उनमे से एक महिला बोली दृ अरे भुल्ली जब तक सास ससुर हैं ,तब तक तो रहना ही है , वैसे हमने भी ले लिया न , देहरादून राजावाला में एक टुकड़ा !! अब देखते है तब !!
भरतु की ब्वारी बोली दृ दीदी ,सास ससुर का तो क्या है ??उमर भी हो गयी अब एक न एक दिन तो जाना ही है !!! मेन तो बच्चो का भविष्य है !! महिला को भी बात जम गई और शाम को पति को फोनकर देहरादून का घूस्याट (जिद) गाड़ (निकाल) दिया !! बेचारा पति भी अगले दिन सुबह गाँव पहुँच गया और दो चार दिन में भरतु की ब्वारी के साथ ही सब बाल बच्चो सहित देहरादून रवाना हो गए !!! अब गाँव मे फिर से दो चार ऐसे परिवार रह गए जो गाँव से निकलना चाहते थे पर मजबूरियां उनके पाँव, गाँव से जोड़े हुई थीं!!!
कुलमिलाकर भरतु की ब्वारी ने गाँव से एक परिवार और पलायन करवा दिया !!!

भरतु की ब्वारी-पार्ट 03

भरतु की ब्वारी देहरादून राजावाला में अपने कमरे में बैठी है और पंखे की हवा खाते हुए ,देहरादून के ताजे रसीले आम चूसते हुए हेड फोन लगाकर किसी से बात कर रही है कृ अरे दीदी इतना बढ़िया प्लाट है न वो ३.!!! पूरा डेढ़ विस्वा का है ,दोनो तरफ सड़क है और घण्टाघर भी घण्टेभर का रास्ता है प्लाट से , वैसे हम ही ले लेते न ३पर हमने एक बना बनाया मकान भी लिया आजकल ही रावत जी से !! एक न एक दिन तो तुमको देहरादून आना ही पड़ेगा ,अभी सस्ता है भाई साब के साथ आ जाओ कल परसों में !!! 
इसी तरह भरतु की ब्वारी एक के बाद एक फोन करने लगी !!! उधर जिस दीदी को फोन किया था , वो आजकल रोपणी लगाने में व्यस्त थी पर भरतु की ब्वारी का जब से फोन आया ,उसके दिमाग मे सिर्फ देहरादून ही घूम रहा था !! पति ग्राम प्रधान था और बीडीसी बैठक में पोखरी गया था !! शाम को फुल्ल मूड में लौटा !!क्योंकि पोखरी ब्लॉक में जाय और बिन पार्टी लौटे ?? सम्भव नही !!! 
खैर !! प्लाट के बारे में बात हुई तो प्रधान जी ने भी अलमारी खोली और सामुदायिक भवन निर्माण के लिए आ रखी रनिंग पेमेंट गिनी और दोनो सुबह देहरादून रवाना हो गए !!! 
भरतु की ब्वारी बेसब्री से इंतजार कर रही थी !! सबसे पहले दोनों को दून झटका मटन शॉप का बकरा और बासमती खिलाई और शाम को प्लाट दिखाते हुए कहने लगी..दीदी अभी तो ये जगह तुम्हे सुनसान सी लग रही होगी .पर..ठीक प्लाट के सामने से 2020 में फॉर लेन सड़क जाएगी ,यहीं बगल पर ही वर्ड की टॉप यूनिवर्सिटी भी बनने वाली है आदि आदि उनको मार्केटिंग के अंदाज में बताते जा रही थी !!! शाम को भरतु की रखी हुई केंटीन की बोतल भी प्रधान जी के सामने रखी और बात पक्की हो गयी !! अगले ही साल प्रधान जी ने भी बोरी बिस्तरा पकड़ा और देहरादून चले गए !!! अब बीच बीच मे विकास कार्यो की पेमेंट के लिए गांव आते रहते हैं , एक मुहर ग्राम विकास मंत्री जी के पास भी दे रखी है उसी से काम चलाते हैं !!!
इस प्रकार गाँव के प्रथम व्यक्ति को भी भरतु की ब्वारी ने देहरादून में सेटल करवा दिया !!!!
अब आजकल अन्य वार्ड मेम्बरों की ब्वारियो को देहरादून आने का न्यौता दे रही है !!!!!! छंअंस ज्ञींसप

भरतु की ब्वारी- पार्ट-04 

भरतु की ब्वारी देहरादून राजावाला में रानी बनकर घूम रही है !!! अब पूरा मोहल्ला ही गाँव और नाते रिश्तेदारों की ब्वारियो से खचाखच भर गया है !!! सब हिंदी टाइप गढ़वाली भाषा में एक दूसरे की चुगली में ज्यादातर व्यस्त हैं !!! गाँव वाले झगड़े यहाँ भी शुरू हो गए हैं !!! गाँव मे तो गाय के उज्याड खाने (दूसरों के खेत मे गाय चराना) और दूसरे के खेत से घास चुराने और पुंगड़े(खेत) की बाउंड्री सरकाने पर झगड़े होते थे ,पर यहाँ बच्चो के आपस मे लड़ने पर ही ज्यादा झगड़े होते हैं !!!
इसी बीच एक परिवार में एक गल्दयो(गाली बकने वाली) बुढ़िया भी है , जो सबकी बुराई करती फिरती है और अगर किसी ने कुछ बोल दिया तो उसके गालियों से पित्तर पूज देती है और देवता लगाने की धमकी देती है !!! गाँव मे तो अनाज, भुज्जी, साग उगाने का कम्पटीशन था पर यहाँ आकर दूसरी,तीसरी,चैथी मंजिल उगाने का कम्पटीशन जारी है !!!
भरतु की ब्वारी ने अपने बामण जी को भी राजावाला में बना बनाया मकान दिला दिया है क्योंकि जब सारे जजमान देहरादून में ही हैं तो पण्डित जी ने गाँव मे क्या करना ?? सब लोगों ने तय किया और बामण जी से कहा कि.. जब सारे ही लोग देहरादून बस गए हैं तो क्यों न अपने इष्ट देव भूमि के भूम्याल देवता को भी यहीं ले आएं ??? देवता भी अकेले अकेले वहाँ क्या करेंगे ?? बामण जी को भी बात जम गई और देवता को भी देहरादून में ही स्थापित कर दिया !!! सबने मिलकर देहरादून में देवता नचाया तो देवता भी भरतु की ही ब्वारी पर ही अवतरित हुआ और कहने लगा ….. मैं बोत प्रसन्न हूँ ,तुम सब से … तुमने मुझे अच्छे स्थान में स्थापित कर दिया है …. अब एक ही ख्वाहिश है ?? सबने कहा क्या ??? तो देवता ने कहा ..जब अगली बार मुझे नचाओगे तब बताऊंगा….ऐसा कहते हुए देवता ने सबको आश्रीवाद दिया …और बामण जी ने शंख बजाकर सबको प्रसाद बांट दिया !!!!
इस प्रकार भरतु की ब्वारी ने गाँव के इष्ट देव को भी देहरादून पलायन करवा दिया !!!! साभार- नवल खाली !!!
मित्रों अब भरतु की ब्वारी के पार्ट-05 में पढ़िए कि देवता की ख्वाहिश क्या थी ??? और ये भरतु की ब्वारी अभी आगे आगे क्या क्या करती है !! तब तक के लिए आप सभी पाठकों को नवल खाली का ढ़ेरों आभार !!! आप सभी के कमेंट से ही हौसला बढ़ता है इसलिए आपका प्यार और सहयोग सदैव यूँ ही बना रहे !!!!

By Editor

8 thoughts on “Where is missing : बड़ी खबर ….उत्तराखंड से भरतु की ब्यारी हुई गुम…!”
  1. उत्तराखंड पहाड़ो से पलायन पर सटीक लेख

  2. जबर्दस्त मैठाणी जी गढ़वाली और हिंदी का मिश्रण और भरतु काफी अदभुत कथा

  3. बहुत खूब नवल जी पलायन पर बिलकुल सही लिखा है हर गांव मे कोई न कोई भरतु की ब्वारी होगी ही होगी….
    आपके अगले एपिसोड की प्रतिक्षा रहैगी…

  4. Naval खाली जी jabardast byang. पलायन पर आपके द्वारा जो byang padh raha hoon lag raha hai ye mere aas पड़ोस मैं ही घटित हो रहा है जैसे. भाषा शैली का जबर्दस्त समन्वय. आप की लेखनी को लाखों साधुवाद.

  5. शानदार जबरदस्त जिन्दाबाद

  6. मेरे बागेश्वर का भी यही हाल है

  7. बहुत अच्छा लिखते हो भाई looking too near to reality….waiting for part 5

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