Commendable : उत्तराखंड पुलिस कर्मियों का प्रेरक आचरण , पुलिस से न दोस्ती भली न दुश्मनी ! की लोकोक्ति को खण्डित कर गया ।

उत्तराखंड पुलिस कर्मियों का प्रेरक आचरण,पुलिस से न दोस्ती भली न दुश्मनी ! की लोकोक्ति को खण्डित कर गया ।

 

 

पुलिस का व्यवहार व ऐसे प्रयास देवभूमि की छवि के सर्वथा अनुरूप हैं और देश-विदेश के पर्यटकों को सुरक्षित और सुगम उत्तराखण्ड भ्रमण के लिए आमंत्रित करने का वो संदेश भी देते हैं जो अन्यथा लाखों-करोड़ों के विज्ञापन भी नहीं दे पाते।

देवेश जोशी Devesh Joshi . Youth icon. report . News . Uttarakhand Police . यूथ आइकॉन मीडिया रिपोर्ट समाचार
देवेश जोशी 

समाज में भले ही, पुलिस से दोस्ती भली न दुश्मनी, एक लोकोक्ति की तरह प्रचलित हो पर उत्तराखण्ड पुलिस के जांबाज सिपाहियों ने अपने प्रेरक और अनुकरणीय आचरण से समाज को राह दिखाने के प्रशंसनीय प्रयास भी समय-समय पर किए हैं और वर्तमान में जिनकी आवृत्ति में उल्लेखनीय तीव्रता आयी है। पुलिस व्यवहार व ऐसे प्रयास देवभूमि की छवि के सर्वथा अनुरूप हैं और देश-विदेश के पर्यटकों को सुरक्षित और सुगम उत्तराखण्ड भ्रमण के लिए आमंत्रित करने का वो संदेश भी देते हैं जो अन्यथा लाखों-करोड़ों के विज्ञापन भी नहीं दे पाते।
ऐसी ही दो उल्लेखनीय घटनाएं उत्तराखण्ड के दो बड़े नगरों से प्रकाश में आयी हैं।

Commendable : उत्तराखंड पुलिस कर्मियों का प्रेरक आचरण , पुलिस से न दोस्ती भली न दुश्मनी ! की लोकोक्ति को खण्डित कर गया ।
प्रशंसनीय  , उत्तराखंड पुलिस कर्मियों का प्रेरक आचरण , पुलिस से न दोस्ती भली न दुश्मनी ! की लोकोक्ति को खण्डित कर गया ।

पहली घटना हल्द्वानी की है जहाँ सीपीयू कर्मी, हरीश बुढलाकोटी व अयूब अली को एक पर्स सड़क किनारे मिला, जिसमे 10000 रूपये मोबाइल फ़ोन, एटीएम कार्ड, पेन कार्ड, डीएल और अन्य चीजें थी, जो की पीलीकोठी निवासी माया गुर्रानी का था, सीपीयू कर्मी हरीश बुढलाकोटी ने फ़ोन पर संपर्क कर उस महिला को बुलाकर उसका सामान वापस लौटाया, महिला ने सीपीयू कर्मी का धन्यवाद किया।
दूसरा मामला राजधानी देहरादून का है। जॉलीग्रांट चौकी इंचार्ज मंजुल रावत ने उनसे मिलने आए छोटे भाई मृणाल रावत जो कि स्वयं भी उत्तराखण्ड पुलिस में है , का ही, बिना हैलमेट पहने बाइक चलाने पर चालान कर दिया।
ये दो घटनाएं भले ही अखबारों में बहुत कम स्थान बना पायी हों पर देश-प्रदेश के आम जनमानस के मन में बड़ा प्रभावछोड़ गयी हैं। ऐसा मानना भी उचित होगा कि पुलिसकर्मियों के इन प्रेरक कदमों में प्रदेश के वर्तमान पुलिस मुखिया की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रेरणा की भी बड़ी भूमिका है। क्योंकि यह सभी को ज्ञात होगा कि कुछ ही समय पहले पुलिस महानिदेशक ने जिस प्रकार से देहरादून ई 0 सी0 रोड़ जब यातायात नियमों का उलंघन किया तो उनका चालान ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मी द्वारा किया गया, तब स्वयं महानिदेशक पुलिस ने अपनी गलती मानते हुए चालान भुगता व पुलिस कर्मी को शाबासी भी दी थी । इसलिए हमें ऩाज है अपने ऐसे पुलिसकर्मियों पर और उनका मार्गदर्शन करते पुलिस मुखिया पर ।

By Editor