KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव हुआ इस बार शिक्षक संघ ।  कैसे हुआ यह चुनाव और क्यों रहा यह चुनाव भिन्न ? बता रहे हैं - देवेश जोशी । 

KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव हुआ इस बार शिक्षक संघ ।  कैसे हुआ यह चुनाव और क्यों रहा यह चुनाव भिन्न ? बता रहे हैं – देवेश जोशी । 

राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखण्ड के नवनिर्वाचित अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी को हार्दिक बधाई।

लेख : देवेश जोशी

कैम्पेनिंग के दौरान,केके के नाम से लोकप्रिय डिमरी की पंचलाइन, व्यक्ति नहीं विचार चुनिए, का जादुई असर हुआ। प्राकृतिक न्याय आधारित वैचारिक रणनीति को राजकीय शिक्षक राजनीति के केंद्र में लाना डिमरी की बड़ी उपलब्धि है जिसके आगे हार-जीत बहुत गौण हो जाती है। अध्यक्ष पद के लिए सात सुयोग्य प्रत्याशियों की दावेदारी के मध्य गणित शिक्षक केके ने पारम्परिक समीकरणों से किनारा कर एक सर्वथा नए समीकरण की इबारत लिखी है। ऐसी इबारत जिसमें किसी के भी स्वयं के अज्ञात छूट जाने की आशंका न्यूनतम हो और जिसमें सुगम-दुर्गम का पक्षान्तर निष्पक्ष तरीके से संभव होने का आश्वासन भी है।
निसंदेह केके की फ्रंटलाइन उत्तराखण्ड आंदोलनकारी होने की पृष्ठभूमि उन्हें मुख्यधारा की राजनीति के लिए भी सुयोग्य बनाती है। इस पर भी शिक्षण को कैरियर चुनते ही उनकी प्राथमिकता में अकादमिक व सामाजिक-सृजनात्मक गतिविधियां ही रही। व्यक्तिविरोध का आधार न उनकी छात्र राजनीति में कभी दिखा और न ही शिक्षक राजनीति में।

KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव हुआ इस बार शिक्षक संघ ।  कैसे हुआ यह चुनाव और क्यों रहा यह चुनाव भिन्न ? बता रहे हैं - देवेश जोशी । 
KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव । 

लंबे समय से, कक्षाओं में डार्विन के योग्यतम की उत्तरजीविता सिद्धांत को पढ़ाने वाले शिक्षकों को इसकी व्यावहारिक समझ, उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद की शैक्षिक परिस्थितियों ने ही दी है। योग्यतम के प्रतिमानों को सुपरिभाषित और सुव्यवस्थित करना ही वो चुनौती है जिसके अभाव में राजकीय शिक्षा व्यवस्था के ह्रास पर अक्सर विलाप किया जाता है।
रा०शि०सं० के पूर्व अध्यक्ष भीम सिंह की वार्तानिपुण अध्येता प्रवृत्ति और राम सिंह चौहान की निरंतर सक्रियता और शिक्षकों से संवादशीलता वो सद्गुण हैं जिनका अनुसरण नवनिर्वाचित अध्यक्ष को भी अवश्य ही करना चाहिए।

KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव हुआ इस बार शिक्षक संघ ।  कैसे हुआ यह चुनाव और क्यों रहा यह चुनाव भिन्न ? बता रहे हैं - देवेश जोशी । 

बड़ी जीत कंधों पर बड़ी चुनौती भी रख जाती है। सिर्फ दुर्गम पहाड़ों में कार्यरत शिक्षकों को न्याय और समता का भरोसा ही एकमात्र अपेक्षा नहीं है मा०मुख्यमंत्री जी द्वारा सुझाये गए थिंक टैक को अस्तित्व में लाकर राजकीय शिक्षा को जनमानस में विश्वसनीय बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना भी पहाड़-सी चुनौती है।
मुकेश बहुगुणा जैसे निर्भीक-वाक्पटु उपाध्यक्ष और सोहन माजिला जैसे राजनीतिक विरासत वाले महामंत्री सहित कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों का साथ व शिक्षक-शिक्षिकाओं का विश्वास लेकर नवनिर्वाचित अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी इन चुनौतियों का सामना कर अपेक्षाओं पर खरे उतरें, ऐसी कामना है।
विविधता और विशालता की दृष्टि से प्रदेश के सबसे बड़े कार्मिक संघठन के प्रदेश स्तर के चुनाव सुव्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराने के लिए जिला इकाई रा शिसं देहरादून व मुख्य निर्वाचन अधिकारी,अपर निदेशक मा०गढ़वाल श्री एम एस बिष्ट जी और उनकी टीम की भूमिका भी उल्लेखनीय है।

सर्वाधिकार : देवेश जोशी 

By Editor

One thought on “KK व्यक्ति नहीं विचार का चुनाव हुआ इस बार शिक्षक संघ ।  कैसे हुआ यह चुनाव और क्यों रहा यह चुनाव भिन्न ? बता रहे हैं – देवेश जोशी । ”
  1. धन्यवाद जोशी जी… इतने सारगर्भित, त्वरित, एवं पठनीय आलेख हेतु..
    रयाल शशि

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