Maharaj and Uniyal evicted from Trivandr cabinet : उत्तराखंड में राजनीतिक सडयंत्र : महाराज व उनियाल उत्तराखंड कैबिनेट से किए गए बाहर ! उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र कैबिनेट से सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल सहित कई मंत्रियों की आखिर कैसे हो गई छुट्टी । ताज राजनीतिक बबंडर पर क्लिक कर पढ़ें अवधेश नौटियाल की रिपोर्ट ।

Logo Youth icon Yi National Media HindiMaharaj and Uniyal evicted from Trivandr cabinet : उत्तराखंड में राजनीतिक सडयंत्र : महाराज व उनियाल उत्तराखंड कैबिनेट से किए गए बाहर !

*उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र कैबिनेट से सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल सहित कई मंत्रियों की आखिर कैसे हो गई छुट्टी । 

* तो क्या सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल के खिलाफ रची जा रही है  गहरी साजिश ?

* सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल व धनसिंह रावत की गिनती वर्तमान सरकार में सबसे सक्रिय मंत्रियों में हो रही है । अब सवाल यह कि आखिर कौन रच रहा हैं इन दिग्गजों के खिलाफ सड्यंत्र ।  

*गौरतलब है कि यह वही लिस्ट है जो त्रिवेन्द्र सरकार गठन के वक़्त भी शोसल मीडिया पर खूब वायरल की गई थी । और वर्तमान में अचानक से एक बार फिर व्हट्स्प पर तमाम ग्रुप में यह लिस्ट सेंड की जा रही है ।  

त्रिवेन्द्र सराकर में बदलाव की फर्जी लिस्ट इस रिपोर्ट के अंत में देखें 

यूथ आइकॉन मीडिया रिपोर्ट,

 उत्तराखंड की राजनीति के तो कहने क्या ? छोटा राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड सबसे ज्यादा राजनीतिक उठापटक देखी है। तरक्की के ख्वाबों को लेकर वजूद में आया उत्तराखंड हमेशा से राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के जाल में फंस हुआ है।
9 नवंबर 2000 उत्तराखंड वजूद में आया, लेकिन उसके बाद बीते 17 सालों के दौरान यह राज्य कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं की महत्वकांक्षाएं पूरी करने की प्रयोगशाला में तब्दील हो गया।

*57 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा सत्ता में आई। bjp आलाकमान ने दीग्गजों को दरकिनार कर तिर्वेंद्र सिंह रावत को cm बना दिया। cm बनने के बाद से तिर्वेंद्र सिंह रावत के लिए भी राजकाज चलाना चलाना टेडी खीर साबित हो रहा है। मंत्रियों में आपसी नूरा कुश्ती देखने को मिल रही है। कुछ तो खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।* पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया मंत्रिमंडल फेरबदल की एक लिस्ट वायरल हो रही है।

उत्तराखंड में सियासी अस्थिरता की कहानी राज्य गठन के वक्त स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी के नेतृत्व में पहली अंतरिम सरकार बनी, लेकिन पहाड़ बनाम मैदान की सोच के आगे वो नहीं चल पाई। जिसके परिणामस्वरूप बीजेपी हाईकमान ने स्वामी को हटाकर भगत सिंह कोश्यारी को नया मुख्यमंत्री बना दिया यानि राज्य गठन के बाद बमुश्किल चौदह महीने में ही बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान दो बार नेतृत्व परिवर्तन हुआ। जिससे तंग आकर उत्तराखंड की जनता ने 2002 में हुए पहले चुनावों में बीजेपी को हराकर कांग्रेस पर भरोसा जताया।

Maharaj and Uniyal evicted from Trivandr cabinet : उत्तराखंड में राजनीतिक सडयंत्र : महाराज व उनियाल उत्तराखंड कैबिनेट से किए गए बाहर ! उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र कैबिनेट से सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल सहित कई मंत्रियों की आखिर कैसे हो गई छुट्टी । ताज राजनीतिक बबंडर पर क्लिक कर पढ़ें अवधेश नौटियाल की रिपोर्ट ।
Maharaj and Uniyal evicted from Trivandr cabinet : उत्तराखंड में राजनीतिक सडयंत्र : महाराज व उनियाल उत्तराखंड कैबिनेट से किए गए बाहर ! उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र कैबिनेट से सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल सहित कई मंत्रियों की आखिर कैसे हो गई छुट्टी…. 

कांग्रेस हाईकमान ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष हरीश रावत की बोई फसल को काटने का मौका नारायण दत्त तिवारी को दे दिया। इसके चलते तिवारी और रावत के बीच लगातार संघर्ष चलता रहा। हालांकि, अपने तजूर्बे के दम पर नारायण दत्त तिवारी कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे।
तिवारी और रावत की खींचतान से तंग उत्तराखंड की जनता ने दूसरे आम चुनाव में बीजेपी पर भरोसा जताया। रिटायर्ड मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूरी के नेतृत्व में उत्तराखंड के जनमानस में नई उम्मीदें बंधी, लेकिन भगत सिंह कोश्यारी स्वामी की तरह जनरल के सामने आ खड़े हुए। मजबूरन बीजेपी हाईकमान ने खण्डूरी को हटाकर रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री बना दिया, लेकिन अतिमहत्वाकांक्षी निशंक ने अपने निजाम के दौरान मैं ही मैं हूं दूसरा कोई नहीं वाले हालात पैदा कर दिए।
निशंक को हटाने के लिए अपनी खण्डूरी और कोश्यारी अपनी दुश्मनी भुलाकर एक हो गए। नतीजतन निशंक की छुट्टी हो गई और फिर खण्डूरी को दोबारा मुख्यमंत्री बनने को मौका मिला, लेकिन उत्तराखंड के जनमानस को ये बेमेल गठबंधन रास नहीं आया और फिर तीसरे आम चुनाव में बीजपी को पछाड़ दिया।
तीसरे आम चुनाव के बाद विजय बहुगुणा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार तो बन गई, लेकिन हरीश रावत नारायण दत्त तिवारी की तरह उनके सामने चुनौती बने रहे। बहुगुणा और रावत के बीच लगातार नूरा-कुश्ती का खेल चलता रहा।
इस बीच केदारनाथ में आपदा के दौरान बहुगुणा की सरकार बेचारी नजर आई और उनकी विदाई की पटकथा तैयार हो गई. आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने बहुगुणा को हटाकर सीएम इन वेटिंग हरीश रावत पर दांव लगा दिया।
मुख्यमंत्री रहते हरीश रावत ने जनमानस के दिल पर तो राज किया, लेकिन कथित वनमैनशिप के चलते उनके खिलाफ असंतोष भी पैदा हो गया। विजय बहुगुणा ने महत्वकांक्षी हरक सिंह रावत को आगे कर सदन में हरीश के खिलाफ बगाबत कर अपना सियासी बदला पूरा कर लिया। केंद्र सरकार ने कैबिनेट की आपात मीटिंग बुलाकर यहां राष्ट्रापति शासन लगा दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए फ्लोर टेस्ट में कांग्रेस विजयी हुई और फिर 11 मई को केंद्र ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया। हरीश रावत अपनी कुर्शी बचाने में भले ही कामयाब हो गए हों लेकिन उनके नेतृत्व में हुए 2017 के चुनाव कांग्रेस की बुरी गत हो गई, हरीश रावत अपनी दोनों सीटें हार गई।

*57 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा सत्ता में आई। bjp आलाकमान ने दीग्गजों को दरकिनार कर तिर्वेंद्र सिंह रावत को cm बना दिया। cm बनने के बाद से तिर्वेंद्र सिंह रावत के लिए भी राजकाज चलाना चलाना टेडी खीर साबित हो रहा है। मंत्रियों में आपसी नूरा कुश्ती देखने को मिल रही है। कुछ तो खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।* पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया मंत्रिमंडल फेरबदल की एक लिस्ट वायरल हो रही है।

इसमें दो दिग्गज मंत्रियों सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल के नाम नही है। यही नही धन सिंह रावत, रेखा आर्य, अरबिंद पांडये के नाम भी लिस्ट से गायब हैं।

*आखिर कोन कर रहा है सरकार और मंत्रियों के खिलाफ ऐशी साजिश?*

*कौन सरकार को अस्थिर करने की साजिशों में लगा हुआ है?*

सरकार को चाहिए की ऐसे अस्थिरता फैलाने वाले और सरकार के खिलाफ साजिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए। ताकि फिर कोई ऐशी हरकत न करे।

ये है सोशल मीडिया की विश्वसनीयता ….! एक नजर मंत्रिमंडल की फर्जी लिस्ट पर – 

कुछ इस अंदाज में वायरल हो रही है ये फर्जी लिस्ट ….

Uttarakhand Cabinet
*नया मंत्रिमंडल/फेरबदल*

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत गोपन,कार्मिक,गृह एंव सतर्कता,उर्जा व तकनिकी शिक्षा।

कैबिनेट मंत्री
1- हरक सिंह रावत लोक निर्माण, सैनिक कल्याण
2- प्रकाश पन्त संसदीय कार्य ,सिचाई,समाज कल्याण।
3- यशपाल आर्य राजस्व, भू-प्रबन्धन,खाद्य नागरिक आपूर्ति ।
4- बंशीधर भगत परिवहन,सहकारिता,
5-मदन कौशिक आबकारी, गन्ना विकास व उद्यान।
6-बलवन्त सिंह भौर्याल चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा व सूचना प्रौघोगिकी।
7- ऋतु खण्डूरी महिला विकास , बाल विकास व ग्राम्य विकास।
8- महेन्द्र भट्ट पंचायती राज,युवा कल्याण व खेलकूद।
9- मुन्ना सिंह चौहान विद्यालयी शिक्षा व उच्च शिक्षा, प्रौढ शिक्षा ।
10- गणेश जोशी कृषि व पशुपालन।
11- बिशन सिंह चुफाल आपदा प्रबन्धन , पेयजल, मतस्य पालन व दुग्ध विकास।
*विधान सभा अध्यक्ष हरवंश कपूर ।*

Rumor

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