एजाज ने धमकाया मंत्री सुबोध उनियाल को! क्या उत्तराखंड पुलिस ले सकती है स्वतः संज्ञान….
दलेर मेहंदी vs मंत्री सुबोध उनियाल! मंच की मर्यादा, कलाकार की तपस्या और एक मंत्री का गुस्सा!
एजाज खान नाम के शख्स ने वीडियो जारी कर कहा कि, मंत्री की किस्मत अच्छी थी जो दलेर के बॉडीगार्ड चुप रहे, शुक्र मनाओ कि वहाँ मिका पाजी नहीं थे, वरना मंत्री को उठाकर फेंक देते और एक घूंट में पी जाते।
यहीं पर एजाज खान अपनी मानसिकता और अज्ञानता दोनों दिखा देता है। उसे ये भी नहीं पता कि मंच पर खड़ा व्यक्ति कोई आम व्यक्ति नहीं, एक निर्वाचित कैबिनेट मंत्री है, जो उस मेले की आयोजन समिति का भी हिस्सा है और #प्रोटोकॉल के तहत जनता का प्रतिनिधि है,कुंजापुरी मेले का वो 2 मिनट का वीडियो आज देशभर में बहस का मुद्दा बना है। टिहरी के नरेंद्रनगर में माँ कुंजापुरी मेले के मंच पर जब पंजाब के स्टार गायक दलेर मेहंदी परफॉर्म कर रहे थे, तभी उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर चढ़ गए और लाइव में ही कह दिया – बोला तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाओगे? इतने पैसे देकर बुलाया, आप बेवकूफ बना रहे हो।मंत्री का आरोप था कि मेहंदी नशे में हैं, लिपसिंक कर रहे हैं और मंच पर खड़े भी नहीं हो पा रहे। सरकार की तरफ से इस शो के लिए 35 लाख रुपये एडवांस, होटल और ट्रेवल का खर्च बताया जा रहा है। मंत्री ने बाद में PTI और ANI से कहा, मैं पछतावा नहीं कर रहा, अगर कलाकार अस्वस्थ था तो उसे मना कर देना चाहिए था। हम पर जनता का दबाव था।
*यहां से दो धाराएं बन गईं : पहली धारा, शालीनता की। अभिनेता अनुपम खेर ने बिल्कुल सधी हुई भाषा में पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, मैं दलेर जी को बरसों से जानता हूँ, जहाँ तक मैं जानता हूँ वो शराब नहीं पीते, पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत ठीक नहीं है। मंत्री जी, आपको शिकायत थी तो आप कलाकार की 35 साल की तपस्या का सम्मान करते हुए अलग से समझा सकते थे, भरे मंच पर अपमान करना ठीक नहीं। एक कलाकार इस मुकाम तक वर्षों की तपस्या से पहुंचता है।
दूसरी धारा, ओछेपन की : एजाज खान नाम के शख्स ने वीडियो जारी कर कहा कि, मंत्री की किस्मत अच्छी थी जो दलेर के बॉडीगार्ड चुप रहे, शुक्र मनाओ कि वहाँ मिका पाजी नहीं थे, वरना मंत्री को उठाकर फेंक देते और एक घूंट में पी जाते। (नोट यह वीडियो बयान का सारांश मात्र है, शब्दश: धमकी भरा बयान हेतु एजाज का वायरल वीडियो बयान सुनें)
यहीं पर एजाज खान अपनी मानसिकता और अज्ञानता दोनों दिखा देता है। उसे ये भी नहीं पता कि मंच पर खड़ा व्यक्ति कोई आम व्यक्ति नहीं, एक निर्वाचित कैबिनेट मंत्री है, जो उस मेले की आयोजन समिति का भी हिस्सा है और #प्रोटोकॉल के तहत जनता का प्रतिनिधि है।
* अब सवाल.. कि क्या एजाज के इस बयान पर #मुकदमा हो सकता है?
जानकारों का मानना है हाँ, हो सकता है। यदि वीडियो प्रमाणित है तो, एजाज द्वारा मंत्री को धमकाने वाला यह बयान विधि विरुद्ध है। क़ानूनविद बताते हैं कि,
BNS की धारा 351, आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) किसी लोकसेवक को उठाकर फेंकने, पी जाने… जैसी हिंसक भाषा में धमकाना, डराना इस धारा में आता है। 2 साल तक की सजा का प्रावधान है, धमकी गंभीर हो तो 7 साल तक।
BNS की धारा 132, लोकसेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग, मंत्री अपने सरकारी कार्यक्रम में मंच पर था, उसे उठाकर फेंकने की बात कहना लोकसेवक के विरुद्ध बल प्रयोग की धमकी है।
BNS की धारा 356, मानहानि, सार्वजनिक मंच (सोशल मीडिया) पर कैबिनेट मंत्री को अपशब्द कहना और वीडियो वायरल करना मानहानि की श्रेणी में आएगा।
BNS की धारा 353(2), जन-उपद्रव और अफवाह फैलाने वाले बयान, ऐसे बयान से समाज में आक्रोश और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है।
इस आधार पर उत्तराखंड पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर या मंत्री की शिकायत पर FIR दर्ज कर सकती है।
*अब सबसे बड़ा सवाल इंसान के आचरण का :
अगर दलेर मेहंदी साहब ने नशा नहीं किया था, जैसा कि अनुपम खेर और मिका सिंह कह रहे हैं कि वो दवाओं पर थे, तबियत खराब थी, तो मंच पर ही उनकी टीम ने मंत्री को तुरंत क्यों नहीं टोका? क्यों नहीं कहा कि मंत्री जी, इन्होंने नशा नहीं किया, स्वास्थ्य कारण से आवाज नहीं निकल रही ? दिलेर मेहंदी टीम के सदस्य चौंके क्यों नहीं? बल्कि बगल में उम्रदराज आदमी सफ़ेद बाल चुटिया वाले की भाव भंगिमा तो बिल्कुल नशे की बात को स्वीकाराने जैसी है यकीन न हो तो आप लोग वायरल वीडियो को दुबारा देख लें… फिर दिलेर ने हाथ जोड़कर प्लीज स्टेज से उतर जाइए ही क्यों कहा?
और दूसरी तरफ, मुझे भी व्यक्तिगत तौर पर किसी बड़े कलाकार को भरे मंच पर मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा ऐसे लताड़ना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मंच के बजाय उन्हें अलग से डांटा या समझाया जा सकता था। मंत्री के द्वारा मंच पर कलाकार को डांटा गया उसी वक़्त हूटिंग होने लगी. ऐसा भी हो सकता था कि दर्शक दीर्घा में मौजूद लोग #भड़क जाते। दिलेर नशे में थे या नहीं यह हम भी पुख्ता तौर पर नहीं कह सकते हैं क्योंकि न तो उनके खिलाफ कोई शिकायत कहीं दर्ज हुई और न ही उनकी किसी तरह की जांच करवाई गई जिससे कि यह पुष्टि होती कि हाँ कलाकार नशे में था। लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना होगा कि… कलाकार चाहे बड़ा हो या छोटा, उसे भी अपने प्रोफेशन से ईमानदारी रखनी चाहिए। स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो आराम करे। 35 लाख की मोटी फीस लेकर जबरन मंच पर आने से अच्छा है, पहले पूरी तरह स्वस्थ हो जाए। हमारी पूरी संवेदना कलाकार के प्रति है।
और यदि वाकई मंत्री का आरोप सच है कि नशे में थे, टीम गा रही थी और मेहंदी सिर्फ लिपसिंक कर रहे थे, तो यह उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी कलाकार के लिए स्टेज, साज-बाज और माइक से ज्यादा पवित्र कुछ नहीं होता। वो स्टेज को मंदिर मानता है, कई बार मंच को चूमता है, क्षमा मांगता है, तब नंगे पांव जाता है। अगर उसी मंदिर का अपमान हुआ है, तो वो भी अफसोसजनक है।
हालांकि मैं किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं कर रहा, मैं सिर्फ सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और उस एक वायरल क्लिप के आधार पर अपनी बात रख रहा हूँ। फैसला तो जनता और सच्चाई का है, पर इतना तय है, मंत्री को तरीका अलग रखना चाहिए था और कलाकार को भी सेहत का सच पहले बताना चाहिए था।
Shashi Bhushan Maithani Paras
शशि भूषण मैठाणी पारस