उत्तराखंड के छह बच्चों ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से मिसाल पेश की है। इनके साहस को आज सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए 6 बच्चों का चयन किया गया है। 6 नवंबर को देहरादून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन बच्चों को सम्मानित किया।
22 दिसंबर 2025 की सुबह चमोली के जीआईसी यूपीएस हरिशंकर स्कूल परिसर में रोजाना की तरह बच्चों की गतिविधियां चल रही थीं। सुबह करीब 9:30 बजे अचानक एक भालू विद्यालय परिसर में घुस आया। इसी दौरान कक्षा 6 में पढ़ने वाला आरव सिंह पुंडीर कूड़ा डालने गया था। तभी भालू ने उस पर हमला कर दिया। यह देखकर आठवीं कक्षा की छात्रा दिव्या ने हिम्मत दिखाई। उसने भालू का सामना करते हुए आरव को बचाने की कोशिश की। इस दौरान दिव्या भी घायल हुई। दूसरी ओर भालू के हमले से बचने के लिए दीपिका समेत अन्य बच्चे एक कमरे में घुस गए और दरवाजा बंद कर लिया।
चंपावत के घुरचुम गांव की 17 वर्षीय माया कांडपाल ने 5 अगस्त 2025 को अद्भुत साहस दिखाया। उस दिन भारी बारिश के कारण पहाड़ों में भूस्खलन हो रहा था। सड़कें बंद थीं और परीक्षा देने के लिए माया अपनी सहेलियों के साथ स्कूल जा रही थी। रास्ते में नदी पार करते समय उसकी दो सहेलियां कोमल और आरती तेज बहाव में बहने लगीं। दोनों को डूबता देखकर माया ने अपनी जान की परवाह नहीं की और उफनती नदी में छलांग लगा दी।
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर इन तीनों बच्चों की बहादुरी को प्रदेश स्तर पर पहचान मिली। 6 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आरव सिंह, दिव्या और दीपिका समेत प्रदेश के 6 बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।