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हिंदी दिवस के अवसर पर  : हिंदी की व्यथा

आपने याद तो किया , रसम के बहाने ही सही, मेरे नाम का दीप जलाया , कसम निभाने को ही सही ।  खुश हूँ कि जिन्दा हूँ , आपकी यादों में कहीं ,  क्या दिल से याद करते हो  ,  कहीं दिखावे को तो  नहीं ? हर ख़ुशी , हर गम में, दिल से जो बात तुमने कही, उसमे सहारा मेरा ही था , क्या ये बात सच  नहीं ? याद रखना ये बात मेरी कही , देख लो तुम दुनिया में जाओ कहीं शीर्ष पर है पहुंचा जग में वही ,  बात जिसने भी भाषा में अपनी कही ।  (अनिल गैरोला)
आपने याद तो किया ,
रसम के बहाने ही सही,
मेरे नाम का दीप जलाया ,
कसम निभाने को ही सही । 
खुश हूँ कि जिन्दा हूँ ,
आपकी यादों में कहीं ,
 क्या दिल से याद करते हो  ,
 कहीं दिखावे को तो  नहीं ?
हर ख़ुशी , हर गम में,
दिल से जो बात तुमने कही,
उसमे सहारा मेरा ही था ,
क्या ये बात सच  नहीं ?
याद रखना ये बात मेरी कही ,
देख लो तुम दुनिया में जाओ कहीं
शीर्ष पर है पहुंचा जग में वही ,
 बात जिसने भी भाषा में अपनी कही । 
(अनिल गैरोला)

By Editor

8 thoughts on “Hindi Diwas : आपने याद तो किया , रसम के बहाने ही सही …!”
  1. अति सुन्दर और सरल भाषा में भाव व्यक्त किये गए हैं। आशा है लेखन जारी रहेगा।

  2. बेहतरीन रचना और व्यथा हिंदी की ।

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