Youth icon media . Shashi bhushan maithani हमारे देश में तो अगर कोई नेता चाहे भी तो ऐसा सम्भव हो ही नहीं सकता । क्योंकि यहाँ चापलूसों की फ़ौज बहुत लम्बी है । समझने की कोशिस करें , मान लो राहुल गाँधी , मोदी , सलमान या एक सामान्य सा MP या MLA हो या अन्य कोई भी रसूख दार इस हाल में हॉस्पिटल में पहुँच जाय तो सबसे पहले वहां के मौहोल को हम मीडिया वालों के प्रोपेगंडा से दो चार होना पड़ेगा जिससे उस जगह भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी । और मजबूरन प्रशासन को भी कमर कसनी पड़ेगी और चिंता होगी सुरक्षा की । इतना ही नहीं कई गंभीर मरीज OT से भी बाहर आने को आतुर हो जायेंगे कि पहले एक झलक विशेष सख्शियत को देख लूँ , कमबख्त बीमारी तो ताउम्र साथ चलती रहेगी । दूसरी ओर कुछ देर पहले डॉक्टर तक पहुँचने के लिए लाईन में खड़े मरीज भी ऐसे लोगों को अस्पताल में देख लाईन से छिटक कर पहले उनके साथ फोटो खिंचवाने लगेंगे ,कोई मुम्बईया स्क्रीन वाला पहुँच गया तो समझो रायता फैलने में तनिक सी देरी नहीं लगेगी । कहने का मतलब साफ़ है जी किसी भी बड़े ओहदे वाले को उसी क्षेत्र में ऐसा देखा जाना सम्भव है जहाँ के लोग भी उतने ही संवेदनशील और समझदार होंगे साथ ही अच्छे वाले शिक्षित होंगे और कायदे कानूनों का पालन करने वाले भी होंगे । हमारे देश में तो बड़े आदमी से नजदीकी भी इसलिए बढाई जाती है कि मै कही पर चालान कटने से बच जाऊं, कोई शराब का ठेका मेरे नाम खुल जाय , नौकरी पा सकूँ या किसी अन्य को नौकरी दिला सकूं , साथ ही नेता अधिकारी के रशूख के चलते रौब्गालीब कर दलाली कर सकूं । अगर मै गलत हूँ तो बताइयेगा आप लोग । मेरा मानना तो यह है जनाब कि हमें खुद को ज्यादा सुधरने की जरुरत है, बजाय दूसरों के उदाहरण पेश करने के । शशि भूषण मैठाणी "पारस"

Youth icon Yi Media Award logo . यूथ आइकॉन वाई आई मीडिया अवार्ड लोगो । shashi bhushan maithani paras . शशि भूषण मैठाणी पारस . uttarakhand । उत्तराखंड

चापलूसों के राज्य में ऐसा संभव होगा कभी ?  भारत जैसे देश में तो अगर कोई नेता चाहे भी, तो ऐसा कभी भी सम्भव नहीं हो सकता ।

Shashi Bhushan Maithani Paras,

सच्ची सच्ची कह रहा हूँ,और यह आप हम सब लोग भी जानते हैं क्योंकि हमारे यहाँ चापलूसों की फ़ौज बहुत लम्बी है ।

समझने की कोशिस करें …..

मान लो राहुल गाँधी , मोदी , सलमान या एक MP , MLA हो या अन्य कोई भी रसूख दार इस हाल में हॉस्पिटल में पहुँच जाय तो सबसे पहले वहां के मौहोल को हम मीडिया वालों के प्रोपेगंडा से दो चार होना पड़ेगा, जिससे उस जगह भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी । और मजबूरन प्रशासन को भी कमर कसनी पड़ेगी और चिंता होगी सुरक्षा की । इतना ही नहीं कई गंभीर मरीज OT से भी बाहर आने को आतुर हो जायेंगे कि पहले एक झलक विशेष सख्शियत को देख लूँ , कमबख्त बीमारी तो ताउम्र साथ चलती रहेगी ।

Youth icon media . Shashi bhushan maithani हमारे देश में तो अगर कोई नेता चाहे भी तो ऐसा सम्भव हो ही नहीं सकता । क्योंकि यहाँ चापलूसों की फ़ौज बहुत लम्बी है । समझने की कोशिस करें , मान लो राहुल गाँधी , मोदी , सलमान या एक सामान्य सा MP या MLA हो या अन्य कोई भी रसूख दार इस हाल में हॉस्पिटल में पहुँच जाय तो सबसे पहले वहां के मौहोल को हम मीडिया वालों के प्रोपेगंडा से दो चार होना पड़ेगा जिससे उस जगह भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी । और मजबूरन प्रशासन को भी कमर कसनी पड़ेगी और चिंता होगी सुरक्षा की । इतना ही नहीं कई गंभीर मरीज OT से भी बाहर आने को आतुर हो जायेंगे कि पहले एक झलक विशेष सख्शियत को देख लूँ , कमबख्त बीमारी तो ताउम्र साथ चलती रहेगी । दूसरी ओर कुछ देर पहले डॉक्टर तक पहुँचने के लिए लाईन में खड़े मरीज भी ऐसे लोगों को अस्पताल में देख लाईन से छिटक कर पहले उनके साथ फोटो खिंचवाने लगेंगे ,कोई मुम्बईया स्क्रीन वाला पहुँच गया तो समझो रायता फैलने में तनिक सी देरी नहीं लगेगी । कहने का मतलब साफ़ है जी किसी भी बड़े ओहदे वाले को उसी क्षेत्र में ऐसा देखा जाना सम्भव है जहाँ के लोग भी उतने ही संवेदनशील और समझदार होंगे साथ ही अच्छे वाले शिक्षित होंगे और कायदे कानूनों का पालन करने वाले भी होंगे । हमारे देश में तो बड़े आदमी से नजदीकी भी इसलिए बढाई जाती है कि मै कही पर चालान कटने से बच जाऊं, कोई शराब का ठेका मेरे नाम खुल जाय , नौकरी पा सकूँ या किसी अन्य को नौकरी दिला सकूं , साथ ही नेता अधिकारी के रशूख के चलते रौब्गालीब कर दलाली कर सकूं । अगर मै गलत हूँ तो बताइयेगा आप लोग । मेरा मानना तो यह है जनाब कि हमें खुद को ज्यादा सुधरने की जरुरत है, बजाय दूसरों के उदाहरण पेश करने के । शशि भूषण मैठाणी "पारस"

दूसरी ओर कुछ देर पहले डॉक्टर तक पहुँचने के लिए लाईन में खड़े मरीज भी ऐसे लोगों को अस्पताल में देख लाईन से छिटक कर पहले उनके साथ फोटो खिंचवाने लगेंगे ,कोई मुम्बईया स्क्रीन वाला पहुँच गया तो समझो रायता फैलने में तनिक सी देरी नहीं लगेगी ।
कहने का मतलब साफ़ है जी किसी भी बड़े ओहदे वाले को उसी क्षेत्र में ऐसा देखा जाना सम्भव है जहाँ के लोग भी उतने ही संवेदनशील और समझदार होंगे साथ ही अच्छे वाले शिक्षित होंगे और कायदे कानूनों का पालन करने वाले भी होंगे ।
हमारे देश में तो बड़े आदमी से नजदीकी भी इसलिए बढाई जाती है कि मै कही पर चालान कटने से बच जाऊं, कोई शराब का ठेका मेरे नाम खुल जाय , नौकरी पा सकूँ या किसी अन्य को नौकरी दिला सकूं , साथ ही नेता अधिकारी के रशूख के चलते रौब्गालीब कर दलाली कर सकूं । अगर मै गलत हूँ तो बताइयेगा आप लोग । मेरा मानना तो यह है जनाब कि हमें खुद को ज्यादा सुधरने की जरुरत है, बजाय दूसरों के उदाहरण पेश करने के ।
शशि भूषण मैठाणी “पारस”

Youth icon Yi Media Award logo . यूथ आइकॉन वाई आई मीडिया अवार्ड लोगो । shashi bhushan maithani paras . शशि भूषण मैठाणी पारस . uttarakhand । उत्तराखंड

 

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