Ireland City in Uttarakhand :  उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच  में आयरलैण्ड की तर्ज पर बसाया गया देश का एकमात्र शहर जिसमें आशंकाओं व आकांक्षाओं के बीच  तलासा जाता है जीवन  ! यहां चमचमाती सड़कें, दुकानें , शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे  पनपती है झुग्गी-झोपड़ियों में जिन्दगीं ।Ireland City in Uttarakhand :  उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच  में आयरलैण्ड की तर्ज पर बसाया गया देश का एकमात्र शहर जिसमें आशंकाओं व आकांक्षाओं के बीच  तलासा जाता है जीवन  ! यहां चमचमाती सड़कें, दुकानें , शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे  पनपती है झुग्गी-झोपड़ियों में जिन्दगीं ।

उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच  में आयरलैण्ड की तर्ज पर बसाया गया देश का एकमात्र शहर जिसमें आशंकाओं व आकांक्षाओं के बीच  तलासा जाता है जीवन  ! 

यहां चमचमाती सड़कें, दुकानें , शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे  पनपती है झुग्गी-झोपड़ियों में जिन्दगीं ।

 

आयरलैण्ड  के नक्शे की तर्ज पर बसाया गया  एक शहर , और यही से शुरू हुआ नगर के विकास का सफर। उत्तराखंड में गढ़वाल के केन्द्र बिन्दु श्रीनगर के साथ यह नगर बदरीनाथ-केदारनाथ जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव भी है, यहां केन्द्रीय विश्वविधालय, एनआईटी, एसएसबी अकादमी, मेडिकल काजेज जैसे बड़े संस्थान है। पिछले 50 वर्षों में श्रीनगर की योजना का सफर जानने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं चाहिए। बस शहर की किसी भी सड़क को पड़क लिजिए और आपको शहर की दिशा व दशा का अंदाजा लग जायेगा। सड़क के एक ओर चमचमाती सड़के, दुकाने व शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे झुग्गी-झोपड़ी में पनपती हुयी जिन्दगीं।

आकांक्षा बदूनी 

अकांक्षा बंदूनी रेल, बसे, कारे, सड़के भले ही इन्हें इंसान ने बनाया हो, लेकिन यही आज हमारी जिन्दगी की रफ्तार तय करते हैं। श्रीनगर शहर भी इसी रफ्तार का दीवाना है। यहीं कारण है कि ग्यारह बार उजड़ने के बाद भी यह नगर तेजी से समृद्धि की और अग्रसर है। जब नगर के बसने व उजड़ने का सिलसिला समाप्त हुआ तब भल्ले गांव से श्रीनगर को बदरीनाथ की ओर एक किलोमीटर आगे आयरलैण्ड  के नक्शे की तर्ज पर बसाया गया, और यही से शुरू हुआ नगर के विकास का सफर। गढ़वाल के केन्द्र बिन्दु श्रीनगर के साथ यह नगर बदरीनाथ-केदारनाथ जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव भी है, यहां केन्द्रीय विश्वविधालय, एनआईटी, एसएसबी अकादमी, मेडिकल काजेज जैसे बड़े संस्थान है।

Ireland City in Uttarakhand :  उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच  में आयरलैण्ड की तर्ज पर बसाया गया देश का एकमात्र शहर जिसमें आशंकाओं व आकांक्षाओं के बीच  तलासा जाता है जीवन  ! यहां चमचमाती सड़कें, दुकानें , शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे  पनपती है झुग्गी-झोपड़ियों में जिन्दगीं ।
Ireland City in Uttarakhand :  उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच  में आयरलैण्ड की तर्ज पर बसाया गया देश का एकमात्र शहर जिसमें आशंकाओं व आकांक्षाओं के बीच  तलासा जाता है जीवन  ! यहां चमचमाती सड़कें, दुकानें , शोपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैंक  दिखाई देते हैं और उसके ठीक पीछे  पनपती है झुग्गी-झोपड़ियों में जिन्दगीं ।

पिछले 50 वर्षों में श्रीनगर की योजना का सफर जानने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं चाहिए। बस शहर की किसी भी सड़क को पड़क लिजिए और आपको शहर की दिशा व दशा का अंदाजा लग जायेगा। सड़क के एक ओर चमचमाती सड़के, दुकाने व सौंपिंग काप्लेक्स व राष्ट्रीयकृत बैक दिखाई देते है और उसके ठीक पीछे झुग्गी-झोपड़ी में पनपती हुयी जिन्दगीं।

महाजन काम्पलेक्स के पीछे बसा नगर का मिस्त्री मोहल्ला आज भी विकास के लिए तरस रहा है, इससे सटा स्वीपर मोहल्ले की और भी बुरी दशा है, नगर की स्वच्छता बनाये रखने वाले यहां के निवासी आज भी विकास से कोंसो दूर है। इन लोगों के बीच लम्बे समय से कार्य करने वाले आईटीई कार्यकर्ता कुशलानाथ का कहना है इस क्षेत्र में नगर के सबसे निर्धन लोग रहते है, और इन्हें आज तक भी पक्के मकान नहीं मिल पायें हैं। इन लोगों को रहने के लिए सरकार द्वारा पक्के मकानों की घोषणा की गयी थी किन्तु भवनों का निर्माण कार्य आज भी कछवां गति से चल रहा है। सरकार व नगर पालिका इन्हें हर बार आश्वासनों से छलती है, और वोट के रूप में इनका राजनीतिक लाभ ऊठाती रहती है। वहीं अगर बदरीनाथ-ऋशिकेश बस अडडे का रूख करे तो यहां बसो और गाडियों से ऊतरने वालो की तादाद बसो में चढ़ने वालो से कही ज्यादा है और इस बात में कोई हैरानी भी नहीं है कि आखिरकार तेजी से शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध होने वाले इस शहर में हर वर्ष करीब दो हजार लोग नई जिन्दगी की शुरूवात करने आते है।

तेजी से बढ़ते शहर की आबादी के कारण नगर अपना विशाल आकार ले रहा है यही वजह है कि वर्तमान का श्रीनगर, श्रीकोट, कीर्तिनगर व चैरास क्षेत्र की ओर अपने पांव पसारने लगा है। नगर की समझ रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनिल स्वामी बताते है कि तेजी से देश के मानचित्र में अपना स्थान बनानेे वाले इस नगर की पहचान खोने का उन्हें डर है। नगर की अधिकांश सड़कों पर आज पांव पसारने को जगह नहीं मिलती। पिछले 20 वर्षों में नगर पालिका की भूमि पर अवैध कब्जे बड़े है, आम आदमी जस का तस है, धन्ना सेटो ने धड़ाधड़ नगर में मकान बनाये है।

पार्किग की समस्या नगर क्षेत्र में विकराल रूप लेती जा रही है। यही कारण है कि तेजी से पडोसी क्षेत्रों में पांव पसारता यह शहर घुटन का आभास कराता है। अगर श्रीनगर के भविष्य की बात की जाय तो आशंकाओं व आकांक्षाओं से भरा इसका भविश्य दिखता है। आशंका बाजारीकरण के बीच अपने व्यकितव को खोने की व आकांक्षा आदर्श नगर कहलाने की।

By Editor

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