Jasrana : बीजेपी को सुप्रीम कोर्ट से कैसे लगा झटका ? आखिर क्या किया था उन्होंने जो भाजपा सरकार के निशाने  पर आ गए थे । लेकिन अब भाजपा को ही उल्टा पड़ गया अपना दांव ! क्लिक करें और विस्तार से पढ़ें …… 

सुप्रीम कोर्ट

Yi डेस्क,  भारतीय जनता पार्टी जहां पहले खुशियां मना रही थी वहीं अब बगलें झांकने लगी है । बताते चलें कि भाजपा के पैंतरेबाजी के खिलाफ दूसरे पक्ष ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से उन्हें मायूसी मिली जिस कारण भाजपाईयों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा लेकिन जैसे ही दूसरे पक्ष के लोग सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे तो वहां से भाजपा को जोरदार झटका लगा है । और अब खुशी मनाने वाले गायब हैं ।
उत्तर प्रदेश में भाजपा शासित योगी सरकार के निशाने पर पंचायते हैं और उसके पीछे कारण है भी छोटी इकाइयों से ही अपने प्रभुत्व को मजबूती के साथ कायम करना । और इसी के चलते जनपद फिरोजाबाद भारतीय जनता पार्टी ने कुछ ऐसा किया कि उसके बाद अब उसे मुंह की खानी पड़ी । दरअसल टूंडला ब्लॉक, जसराना ब्लॉक, और नारखी ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुखों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी तो उन्हें कोर्ट से अविश्वास प्रस्ताव पर स्टे मिल गई है । जिसके बाद से भाजपा के कुनबे में सन्नाटा तो समाजवादियों के कुनबे की बांछें खिल गई हैं ।

उक्त सभी तीनो ब्लॉकों में भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद तीनों ब्लॉक प्रमुखों ने सबसे पहले हाईकोर्ट में गुहार लगाई लेकिन तीनों में से किसी को भी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली जिसके बाद सभी ने सरवोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगा दी जिसे स्वीकार कर लिया गया और सुनवाई हुई फिर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए उक्त मामले में स्टे देते हुए पूर्व की भांति यतस्थिति बनाए रखने के आदेश दे दिए जिसके बाद सपाइयों के खेमें में खुशी लहर दौड़ पड़ी है ।

भारी पड़ गया दांव भाजपा को :

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि उत्तर प्रदेश गैर भाजपा ईकाइयां मतलब पंचायतें योगी सरकार के निशाने पर थे । क्योंकि छोटी सरकारों के गठन के लिए सूबे में चुनावी सियासत गर्म थी । इसी के चलते बीते 7 जुलाई को सबसे पहले डॉ0 रामपाल यादव ब्लॉक प्रमुख जसराना के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था ।
फिर एक के बाद एक करके भाजपाइयों ने सभी क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने खेमे में लाकर अविश्वास प्रस्ताव को पारित करा दिया था। इसमें मजेदार बात तो यह रही कि भाजपाइयों ने इस खेल में अपनी ताकत का भी भरपूर उपयोग किया और संदेश भी दिया उसके लिए जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव (सपा) जो कि MLC के भाई हैं के विरुद्ध ही सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित करवा दिया और फिर तीनों ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ यही हथकंडा अपना लिया था । लेकिन अब भाजपाईयों का दांव उन्हें ही उल्टा पड़ गया है ।
समाजवादियों का सवाल खड़े किए कि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया ही पूरी तरह से नियम विरुद्ध थी । इसलिए उन्होंने बड़ी सख्ती के साथ कोर्ट में दस्तक दी । नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया के लिए नोटिस 15 दिन पहले दिया जाना चाहिए लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया जिस कारण शुरू से ही भाजपा का यह अविश्वास प्रस्ताव सवालों के घेरे में रहा । बताते चलें कि भाजपाईयों ने 15 दिन के बजाय मात्र 12 दिन के नोटिस में ही सारी प्रक्रिया कर ली थी जो अब सपाइयों के लिए संजीवनी बन काम आई है । और अब दिनेश यादव जो कि नारखी से ब्लॉक प्रमुख हैं उनका कहना है कि यह सत्य की जीत है । जनता भाजपा के सभी हथकंडों से वाकिफ हो गई है । यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा क्योंकि इस केस के पैरवी दिग्गज नेता व वकील कपिल सिब्बल व वकील अशोक कुमार कर रहे थे ।

By Editor