रेणुका परियोजना पर उत्तराखंड सहित 5 राज्यों का भारत सरकार से हुआ करार ।  ◆ उत्तराखंड को 19.72 MCM पानी घरेलू और सिंचाई उपयोग के लिए मिलेगा ।  ◆उत्तराखंड , हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमांचल और दिल्ली को मिलेगा लाभ । 

Youth icon yi media logo . Youth icon media . Shashi bhushan maithani paras

 

◆ रेणुका परियोजना पर उत्तराखंड सहित 6 राज्यों का भारत सरकार से हुआ करार । 

◆ उत्तराखंड को 19.72 MCM पानी घरेलू और सिंचाई उपयोग के लिए मिलेगा । 

◆उत्तराखंड , हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमांचल और दिल्ली को मिलेगा लाभ । 

रेणुका परियोजना पर उत्तराखंड सहित 5 राज्यों का भारत सरकार से हुआ करार ।  ◆ उत्तराखंड को 19.72 MCM पानी घरेलू और सिंचाई उपयोग के लिए मिलेगा ।  ◆उत्तराखंड , हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमांचल और दिल्ली को मिलेगा लाभ । 

किसाऊ बहुद्देशीय परियोजना पर आज शनिवार (12 जनवरी 2018) को होगा एमओयू । 
  • रेणुका परियोजना के बाद किसाऊ परियोजना पर भी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के मध्य होगा एमओयू।

  • किसाऊ परियोजना भी है राष्ट्रीय परियोजना।

  • देहरादून में टोंस नदी पर  बनेगी किसाऊ परियोजना, 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन के साथ ही 617 एमसीएम पानी की होगी उपलब्धता।

शनिवार को नई दिल्ली में किसाऊ बहुद्देशीय परियोजना पर 6 राज्यों में एमओयू किया जाएगा। राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर घोषित इस परियोजना के एमओयू पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के मुख्यमंत्री हस्ताक्षर करेंगे।
शुक्रवार को नई दिल्ली में रेणुका बहुद्देशीय परियोजना के एमओयू होने के बाद श्रमशक्ति भवन में केंद्रीय मंत्री  नितिन गड़करी की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर के मध्य किसाऊ परियोजना के क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया।
किसाऊ परियोजना देहरादून जिले में टोंस नदी पर स्थित बहुद्देशीय परियोजना है। इसे वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसमें भारत सरकार द्वारा जल घटक का 90 प्रतिशत की सीमा तक अनुदान सहायता के रूप में दिया जाएगा।
उत्तराखण्ड की सचिव ऊर्जा  राधिका झा ने बताया कि परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 97076 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई और घरेलू व औद्योगिक उपयोग के लिए 617 एमसीएम पानी उपलब्ध होगा। परियोजना से होने वाले सिंचाई व जल संबंधी लाभों का बंटवारा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के मध्य किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत 11550 करोड़ रूपए है।   

By Editor