Security : बलूनी निर्भीक – अजय भट्ट भयभीत ! किससे है भट्ट को ख़तरा पढ़ने के लिए क्लिक करें । 

आम जनता की पहुँच से बाहर हुए अजय भट्ट ! भट्ट जी से मिलना अब आसान नहीं । 

 

शशि भूषण मैठाणी 'पारस'
शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’

उत्तराखंड राज्य में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार और केंद्र में मजबूत मोदी सरकार दोनों को मिलाकर तैयार हुआ डबल इंजन । जिसे कहा गया जन अपेक्षाओं पर खरी उतरने वाली डबल इंजन की मजबूत भरोसमंद सरकार ।
अब इस सबके बीच सरकार के भी दावे कि आम नागरिक भयभीत न हों, वह अब पूरी तरह से सुरक्षित है । लेकिन सरकार के इस ढ़ोल पीटते दावे के बीच में अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने जिस तरह से अब अपने को जान का खतरा बताया तो आम जन का आश्चर्यचकित होना भी लाजमी ही है । सत्ताधारी दल के प्रमुख द्वारा अगर खुद को असुरक्षित बताकर सुरक्षा मांगी गई है तो बड़ा सवाल उठाता है, वह भी उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में । इतना ही नहीं इस तरह से पार्टी के एक बड़े नेता का अपने जीवन को खतरा बताना राज्य सरकार की कार्य क्षमता के ऊपर भी अपने आप में बहुत बड़ा सवालिया निशान है ।

अब अजय भट्ट सुरक्षा घेरे में रहेंगे । आम जनता की पहुँच से दूर रहेंगे अब BJP अध्यक्ष !

और अगर यह भी मान लें कि अजय भट्ट ने खुद सुरक्षा नही मांगी, सरकार ने खुद ही उन्हें सुरक्षा प्रदान की तो फिर भी प्रश्न तो उठता है कि, किससे खतरा है भट्ट को ? किसके निशाने पर हैं अजय भट्ट ? जिम्मेदार गृह विभाग ने कुछ तो होमवर्क किया होगा ! यदि सरकार के जिम्मेदार विभाग ने पुख्ता तौर पर अजय भट्ट को खतरा बताकर सुरक्षा देने का सुझाव सरकार को दिया है तो यह भी साफ़-साफ़ सन्देश है कि राज्य में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है । कोई बड़ा खतरा तो है जिसने प्रदेश में हमारे बड़े नेताओं की नींद उड़ा दी है और अब सरकार खुद उन्हें सुरक्षा मुहैय्या करवा रही है तो सोचिये ऐसे में आम जनता की क्या औकात उन्हें तो चींटी की तरह मसल दिया जाएगा । सरकार से इस मौके पर जबरदस्त मांग की जानी चाहिए कि नेताओं के साथ साथ आम जन को भी आप सुरक्षा प्रदान कीजिएगा साहब । खैर !

अब सवाल यह कि क्यों हमारे नेताजन सुरक्षा चक्र को अपनी प्रतिष्ठा मान लेते हैं ? बेहतर होता कि नेता जी जनता के बीच में काम करते , जनता का दिल जीतते तो जनता सर आँखों पर बैठा लेती ।
आज जिस तरह से सरकार ने अपने ही दल के प्रमुख अजय भट्ट को जो सुरक्षा प्रदान की है उसका स्पष्ट अर्थ यह है कि उत्तरखंड जैसे शांत प्रदेश में निश्चित तौर पर अराजक वातावरण पनप गया है । और इस बात की पुष्टि सरकार ने सुरक्षा मुहैय्या करा कर की है ।
गंभीरता से सोचने वाली बात है जहाँ एक ओर विपक्ष की सरकार (कांग्रेस सरकार) में जहां अजय भट्ट बिना सुरक्षा के घूम रहे थे उन्हें अब अपनी ही सरकार में जीवन पर खतरा सामने दिखाई पड़ रहा है । आखिर कौन है अजय भट्ट का दुश्मन जिससे उन्हें हो गया जान का खतरा ? निःसंदेह यह निर्णय राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हैं ।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए सांसद अनिल बलूनी ने अपने को प्रदान की गई वाइ श्रेणी की सुरक्षा को लौटा कर एक नई मिसाल पेश की है । anil baluni BJP
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए सांसद अनिल बलूनी ने अपने को प्रदान की गई वाइ श्रेणी की सुरक्षा को लौटा कर एक नई मिसाल पेश की है ।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए सांसद अनिल बलूनी ने अपने को प्रदान की गई वाइ श्रेणी की सुरक्षा को लौटा कर एक नई मिसाल पेश की है । इस बीच बलूनी का वाई श्रेणी सुरक्षा वह भी एस्कॉर्ट सहित लौटाने का अनुरोध बाकी लोगों से नैतिक मांग तो करता ही है । अनिल बलूनी जो कि राज्यसभा सांसद हैं प्रधानमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं आए दिन राष्ट्रिय मीडिया की बहस में आमने सामने होकर टीवी पर अलगाववादी नेताओं से लेकर नक्सलियों को कोसते हैं, उन्हें राष्ट्रद्रोही कहते हैं और उनसे सीधी भिड़ंत करते हैं ऐसे में अगर उन्हें इस दर्जे की सुरक्षा सरकार द्वारा प्रदान की गई जिसे वह स्वीकार भी लेते तो शायद कोई सवाल न उठता । इस सबके बीच अनिल बलूनी ने स्वयं को देवभूमि उत्तराखण्ड में सुरक्षित बताते किसी भी खतरे की संभावनाओं को दरकिनार कर सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख सुरक्षा वापस लेने का अनुरोध कर दिया है । और ठीक इसके उलट कई लोग ऐसे भी हैं जो महज अपनी बनावटी प्रतिष्ठा के लिये हूटर, पुलिस सुरक्षा और एस्कोर्ट आदि के लिए भी लालायित हैं । जो अपने आपमें बड़ा सवाल है ।

यहाँ मुझे यह लिखने में कोई गुरेज नहीं कि इस राज्य का निर्माण उत्तर प्रदेश से अलग इसलिए किया गया था कि राज्य का विकास हो किंतु आज नेता अपने प्रतिष्ठा के लिए जिस तरह सुरक्षा चक्रों की मांग कर रहे हैं या कहें कि जुगाड़ कर रहे हैं इससे राज्य को बनाने का मकसद कहीं कोसों पीछे छूट जाता है । और हमारे नेताओं की यही छोटी – छोटी महत्वकांक्षाओं का नतीजा है कि बीते 18 वर्षों में विकास की राह को ताकते ताकते पहाड़ के रहवासियों ने पहाड़ से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी और आज खंडहरों में तब्दील पहाड़ जो कभी समृद्धि का प्रतीक था वह अब इतिहास के पन्नों में दफन होने के कगार पर पहुँच गया है । और कारण हैं सिर्फ और सिर्फ हमारे नेतागण ।

शशि भूषण मैठाणी “पारस” 

By Editor

One thought on “Security : बलूनी निर्भीक – अजय भट्ट भयभीत ! किससे है भट्ट को ख़तरा पढ़ने के लिए क्लिक करें । ”
  1. वाइ श्रेणी की सुरछा वापस कर महोदय,राज्यसभा सान्सद बलूनी जी ने निर्भयता का परिचय दिया है । एसा करके ऊन्हौने राजकोष का खर्च कम किया है । यह उदाहरणीय है । एच आर आर्य । नवी मुम्ब्ई

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