Youth icon yi Media logoSumadi Dhwaj sthapna Diwas : अनूठी परंपरा सुमाड़ी का ध्वज स्थापना पर्व…!

Jay Prakash Kala . Yi Report
Jay Prakash Kala . Yi Report
सुमाड़ी में 35 फीट लम्बे स्तंभ पर हनुमान जी की प्रतीक लाल रंग की धर्म ध्वज ध्वज स्थापना की अनूठी परंपरा ।
सुमाड़ी में 35 फीट लम्बे स्तंभ पर हनुमान जी की प्रतीक लाल रंग की धर्म ध्वज ध्वज स्थापना की अनूठी परंपरा ।

संस्कृति किसी भी क्षेत्र की पूंजी होती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलती है| उत्तराखंड के पहाड़ों मे बसे गांवो की व्रिरासत और परम्पराएं भी उतनी ही अनूठी हैं| जितने गांव उतनी ही अनोखी परम्पराएं,चाहे गढ़वाल-कुमांऊ की सम्मिलित नंदा देवी राजजात हो,

जौनसार की ‘मौण’ हो या चमोली जिले की विश्व धरोहर ‘रम्माण’ हो , सभी में स्थानीय संस्कृति के रंग घुले होते हैं| ऐसी ही एक परम्परा है पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध सुमाड़ी गांव की ‘झंडा घैंटण’ या ध्वज स्थापना, जो राम व कृष्ण को समर्पित है व हनुमान द्वारा एक सेतु के रूप में दोनों को जोड़ती है|
भाद्रपद महीने मे, कृष्ण जन्माष्टमी के पहले दिन उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में यह पर्व मनाया जाता है जिसे स्थानीय लोग’गृहस्थों’ की जन्माष्टमी कहते हैं| सुमाड़ी में इस दिन की शुरुआत कन्हैय्या की पूजा व उपवास से होती है| गांव में गौरा देवी के मंदिर ‘पटगाण’ व शिव मंदिर ‘मांडा’ में विशेष

पूजा अर्चना की जाती है | पूरे गांव से आटा,गुड़, तेल आदि सामग्री एकत्र की जाती है, जिससे हनुमान जी के नाम का ‘रोट’ बनाया जाता है| इसके बाद लगभग ३५ फीट लम्बे स्तंभ पर हनुमान जी की प्रतीक लाल रंग की धर्म ध्वज को लगाया जाता है| नवयुवक इस भारी भरकम ध्वजा को कंधे पर उठा कर गांव के बीच में स्थित

 गांव में गौरा देवी के मंदिर 'पटगाण' व शिव मंदिर 'मांडा' में विशेष पूजा अर्चना की जाती है | पूरे गांव से आटा,गुड़, तेल आदि सामग्री एकत्र की जाती है, जिससे हनुमान जी के नाम का 'रोट' बनाया जाता है|
गांव में गौरा देवी के मंदिर ‘पटगाण’ व शिव मंदिर ‘मांडा’ में विशेष पूजा अर्चना की जाती है | पूरे गांव से आटा,गुड़, तेल आदि सामग्री एकत्र की जाती है, जिससे हनुमान जी के नाम का ‘रोट’ बनाया जाता है|

मैदान ‘नौखंड’ में हनुमान,शिव व माता के नाम के भजन गाते हुए लेकर आते हैं| ‘हनुमंत राम रसिया, रक्षा करो हमारी’ की स्वरलहरियों के बीच हनुमान अपने ‘पश्वा’ पर अवतरित होते हैं व भक्तों को आशीर्वाद देते हैं| भजन कीर्तन के बीच ‘रोट’ काटा जाता है, झंडा घैंटा (स्थापित किया) जाता है और प्रसाद बांटा जाता है| इस

पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध सुमाड़ी गांव की 'झंडा घैंटण' या ध्वज स्थापना, जो राम व कृष्ण को समर्पित है व हनुमान द्वारा एक सेतु के रूप में दोनों को जोड़ती है|
पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध सुमाड़ी गांव की ‘झंडा घैंटण’ या ध्वज स्थापना, जो राम व कृष्ण को समर्पित है व हनुमान द्वारा एक सेतु के रूप में दोनों को जोड़ती है|

दिन के बाद से रामलीला की तालीम और तैयारियां शुरू हो जाती हैं| एक महीने तक वह पताका स्थापित रहती है और रामलीला के अंतिम दिन हनुमान के पात्र और भक्तों के पूजा अर्चन के साथ ध्वज को उतारा जाता है| इस तरह कृष्ण जन्म से शुरू यह उत्सव राम पर जाकर सम्पूर्ण होता है| इस वर्ष भी ‘झंडा घैंटण’ का पर्व आज २४ अगस्त को मनाया गया| इसी साल सुमाड़ी की रामलीला के १०० वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो यह पर्व न सिर्फ गांव बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए और भी खास हो गया है| इस परंपरा व रामलीला के सफल १०० वर्षों के लिए समस्त सुमाड़ी ग्रामवासियों को ‘यूथ आइकन’ की पूरी टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामना और बधाई|

*जय काला , 

Copyright: Youth icon Yi National Media, 26.08.2016

यदि आपके पास भी है कोई खास खबर तोहम तक भिजवाएं । मेल आई. डी. है – shashibhushan.maithani@gmail.com   मोबाइल नंबर – 7060214681 , 9756838527  और आप हमें यूथ आइकॉन के फेसबुक पेज पर भी फॉलो का सकते हैं ।  हमारा फेसबुक पेज लिंक है    https://www.facebook.com/YOUTH-ICON-Yi-National-Award-167038483378621/

यूथ  आइकॉन : हम न किसी से आगे हैंऔर न ही किसी से पीछे ।

By Editor

One thought on “Sumadi Dhwaj sthapna Diwas : अनूठी परंपरा सुमाड़ी का ध्वज स्थापना पर्व…!”
  1. जय प्रकाश काला जी आपके इस प्रयास से हमें भी इस परम्परा का ज्ञान प्राप्त हुआ जिसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई ,साथ ही इस परम्परा व रामलीला के सफल 100 वर्षों के लिए सम्पूर्ण सुमाणीं ग्रामवासियों को बहुत बहुत शुभकामनायें ।

Comments are closed.