तो क्या उत्तराखण्ड पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में गढ़वाल सांसद मेजर जनरल भुनव चंद खण्डूरी के मजबूत विकल्प बनेंगे कर्नल अजय कोटियाल ।
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X CM Khanduri has set up one more example of his devotion towards his work : सुबह भगवान के द्वार पर बेहोश हो गए पूर्व CM खण्डूरी । और दिन में पहुँच गए संसद …!

Shashi Bhushan Maithani 'Paras' Youth icon Yi Report
Shashi Bhushan Maithani ‘Paras’
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आज सुबह बदरीनाथ के कपाट खुलने के अवसर पर

पूर्व मुख्यमंत्री एवं गढ़वाल सांसद मेजर जनरल भुनव चंद खण्डूरी
पूर्व मुख्यमंत्री एवं गढ़वाल सांसद
मेजर जनरल भुनव चंद खण्डूरी

पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में गढ़वाल सांसद मेजर जनरल बी. सी. खण्डूरी मंदिर परिसर में अचानक से बेहोश हो गए । जिसके बाद वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों में अफरा तफरी मच गई  थी ।

दरअसल जनरल खण्डूरी भी मंदिर में दर्शन हेतु सुबह साढ़े चार बजे ही पहुँच चुके थे । 4 बजकर 35 पर जैसे ही मंदिर के कपाट खुले तो उसके बाद कतार में खड़े श्रद्धालु भी बारी – बारी मंदिर में प्रवेश कर रहे थे । कुछ ही देर बाद अचानक से मंदिर में प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही बढ़ी और कुछ पल के लिए दर्शन भी प्रभावित हुई । मंदिर परिसर में मीडिया या कैमरा ले जाने पर रोक रहती है तो इस लिहाज से सिंहद्वार से बाहर कुछ जानकारी ठीक से नहीं मिल पा रही थी ।  हालाँकि कुछ देर बाद पता चला कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जनरल खण्डूरी की तबियत बिगड़ गई है । मंदिर के अंदर से बाहर आए कुछ यात्रियों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री परिसर में अचानक

 बदरीनाथ के कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे श्रद्धालु भगवान के दर्शनों के लिए मंदिर मे प्रवेश करते हुए ।
बदरीनाथ के कपाट खुलते ही  पहुंचे श्रद्धालु भगवान के दर्शनों के लिए मंदिर मे  ।

से बेहोश होकर लड़खड़ा गए और उसके बाद उन्हें 10 से 15 मिनट तक होश नही आया ।
इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों में भी अफरातफरी मची रही , आनन-फानन में डॉक्टर भी आए और उनका चैकअप किया गया । जब काफी देर तक पूर्व मुख्यमंत्री मंदिर के अंदर वाले परिसर में अचेत पड़े रहे तो उस बीच मन्दिर प्रशासन व जिला प्रशासन में  खाशी बेचैनी बनी रही । बताया गया कि जनरल खण्डूरी को स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई ऐसी गंभीर बिमारी भी नहीं है , हो सकता है कि उम्र के 80 दशक पूरे कर चुके जनरल को उनकी बढ़ती उम्र में बदरीनाथ का बेहद ठण्डा मौसम व ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोशी (मूर्छा) आ गई हो ।  खण्डूरी को होश आने पर उन्हें चिकित्सकों द्वारा कम से कम दो घंटे तक आराम करने की सलाह दी गई ।

हेलीकाफ्टर से लाए गए देहरादून :
बदरीनाथ में अचानक से स्वास्थ्य बिगड़ जाने के कारण जनरल खण्डूरी को हेलीकाफ्टर से देहरादून तक लाया गया और उसके बाद जौलीग्रान्ट से हवाई जहाज के मार्फत सीधे दिल्ली भेजा गया । खण्डूरी की तबियत बिगड़ जाने के कारण उनकी जोशीमठ में आयोजित होने वाली मीटिंग भी स्थगित कर दी गई ।

और खण्डूरी पहुँच गए सीधे संसद में :
सुबह बदरीनाथ  में पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूरी की तबियत बिगड़ने के बाद माना जा रहा था कि उन्हें उपचार के लिए देहरादून या दिल्ली के किसी बड़े अस्पताल में ले जाया जाएगा । मीडिया भी पल पल की खबर जुटाने में लगा था लेकिन खण्डूरी दोपहर में दिल्ली पहुंचने पर सीधे संसद भवन चले गए । मुझे भी यह बात तब पता चली जब मैंने पूर्व मुख्यमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी जुटानी चाही । मेरे द्वारा किए गए फोन को उनके पी ए प्रकाश सिंह रावत ने रिसीव किया और उन्होंने बताया कि साहब संसद गए हैं । मैं आश्चर्चकित हुआ और पूछा कि उनकी तो तबियत काफी बिगड़ गई थी सुबह बदरीनाथ में तो फिर इसके जबाब में उनके पी ए  श्री रावत ने बताया कि हाँ हुई थी लेकिन अब ठीक हो गए तो साहब पार्लियामेंट चले गए और साहब ने कहा कि संसद भवन एनेक्सी में ही वह अपना उपचार करवा लेंगे ।

सच  बताऊँ तो आज देश के अंदर जिस तरह के राजनीतिक हालत बने हुए हैं , उसके बीच नेता चाहे  छोटा हो या बड़ा हो और फिर किसी भी दल से क्यों न हो वह हर जगह पॉलिटिकल माईलेज ढूंढ लेते हैं । लेकिन आज जिस तरह भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री, एक  प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ,वर्तमान मे संसद सदस्य व सेना मे मेजर जनरल रहे भुवन चंद खण्डूरी बदरीनाथ मंदिर परिसर में बेहोश हो गए थे, उसके बाद यात्रियों को किसी तरह की परेशानी प्रशासन ने नहीं होने दी शायद अधिकारी नेताओं के व्यवहार को हमेशा याद रखते हैं । इतना ही नहीं खण्डूरी की तबीयत बिगड़ जाती है इसकी भनक मीडिया तक को नहीं लगती है और नाही वहां औजूद यात्रियों को यह पता चल पाता है कि उनके सामने बेहोश हुआ को सख्श देश का आइकॉन पॉलिटिशन है । मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि वहाँ पर मौजूद जिला प्रशासन ने खण्डूरी को तबज्जो नहीं दी बल्कि मै यह बताना चाह रहा हूँ कि प्रशासन ने भी  खण्डूरी के स्वभाव के हिसाब से ही काम किया और उन्हे पूरा सम्मान भी दिया । चिकित्सकों की सलाह पर जनरल  खण्डूरी ने कुछ समय तक बदरीनाथ में आराम भी उसके बाद उन्हें हेलीकाफ्टर देहरादून भेजा गया माना जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूरी को देहरादून के किसी  अस्पताल में ले जाया जाएगा , लेकिन खण्डूरी जौलीग्रांट से सीधे दिल्ली चले गए फिर यह कयास लगे कि अब उन्हे दिल्ली के किसी बड़े अस्पताल मे ले जाया जाएगा लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ । बल्कि अब जनरल खण्डूरी सीधे पहुँच गए संसद भवन स्थित एनेक्सी में जहां उन्होने अपना चैकअप करवाया और सब सामान्य रहने की दशा में पहुँच गए संसद की कार्यवाही में भाग लेने जिस काम के लिए जनता ने उन्हें चुना है ।

कुलमिलाकर आज जनरल खण्डूरी ने अपनी परिपक्व और बेहद ईमानदार सोच की मिशाल कायम की है । भले ही अमित शाह और मोदी की जोड़ी उन्हे अभी तक पहचान न पाई हो लेकिन  आम लोगों के मन में जनरल खण्डूरी हमेशा से आइकॉन पोलिटिशियन रहे हैं और हमेशा रहेंगे भी ।

X CM Khanduri has set up one more example of his devotion towards his work .

शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’   

Copyright: Youth icon Yi National Creative Media , 11.05.2016 

By Editor

7 thoughts on “X CM Khanduri has set up one more example of his devotion towards his work : सुबह भगवान के द्वार पर बेहोश हो गए पूर्व CM खण्डूरी । और दिन में पहुँच गए संसद …!”
  1. General khanduri je is a icon, nowadays in politics we can not find people like him. He is straight forward, honest, discipline, punctual, great administrator,a man of high character, and dedicated,focused and a visionary.

  2. चुनाव मे शराब बटवाते वक्त पकडे जाने वाला व्यक्ति देश काआइकॉन पॉलिटिशन हा हा हा

  3. सबसे पहले (सेनि)ले.जनरल भुवनचंद्र खंडूरी के जल्द स्वस्थ होने पर संतोष। फिर उनकी अपरिमेय कर्तव्यनिष्ठा को नमन। कि सुबह बदरीनाथजी में बेहोश जाने के बाद उसी दिन दिल्ली पहुँचाये जाकर वे वह अस्पताल में भरती नहीं हुए और सीधे संसद में जा पहुँचे, जबकि उन पर अस्पताल में भरती हो जाने का भारी दबाव था। काश,हम सब ऐसे कर्तव्यनिष्ठ हो पाते!

  4. गढ़वाल में एक लोकोक्ति है: बदरीनाथ पहुँचा हुआ बीमार
    नीचे उतरा तुरंत सुधार!

  5. जज्बा है आखिर फौजी के साथ साथ अब राजनीतिज्ञ भी है और कर्तव्य तो कर्तव्य है ये एक फौजी से ज्यादा कौन समझ सकता है

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