Youth Icon Journalist Of the week के विशेष साक्षात्कार की कड़ी में शामिल हुए दैनिक जागरण उत्तराखंड के राज्य ब्यूरो प्रमुख विकास धूलिया ।

Journalist of the week Vikas Dhuliya :  नवभारत टाइम्स के स्ट्रिंगर से दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो प्रमुख बनने तक का शानदार सफर ….! 

* पत्रकार की लेखनी ही उसकी पहचान

* पत्रकार को बनानी पड़ती है हर जगह नई पहचान, जो सरल नहीं 

               -: जर्नलिस्ट आइकॉन ऑफ  द वीक :-  

हमारे इस कॉलम को शुरू करने का उददेश्य है समाज के उन प्रहरियों को सामने लानाए जो तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद हम आप तक सच को पहुंचाने का काम करते हैं। जिन्हें पहचानते तो हम हैं लेकिन उनके बारे में जानते बहुत कम हैं। जनहित के मुद्दे हों या फिर सरकार को आईना दिखाने का काम, हमेशा अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह  करते हैं कलम के सिपाही।

विकास धूलिया राज्य ब्यूरो प्रमुख दैनिक जागरण

स्ट्रिंगर से राज्य ब्यूरो प्रमुख के पद तक का सफर, दैनिक जागरण में लगभग18 वर्ष का कार्यकाल

देश में कई कलम के सिपाही हैं जिन्होने अपनी लेखनी की बदौलत पत्रकारिता में नए आयाम स्थापित किए हैं। पत्रकारिता में प्रशिक्षु पत्रकार इनके लेखों को पाते हैं और उनसे सीखने की कोशिश करते हैं। हर हफ्ते में हम आप से ऐसे ही किसी पत्रकार को रूबरू कराएंगे, जिसकी कलम जब लिखती है तो तख्त और ताज तक चोट करती है, जनता की वेखौफ आवाज बनकर व्यवस्था परिवर्तन की ताकत रखती है। हमने अपने इस कॉलम की शुरूआत की है पत्रकारिता जगत की धड़कन, इनका नाम लेते ही इनके संस्थान का नाम बरबस ही जुबान पर आ जाता है। यह किसी पहचान के मोहताज नहीं है। शून्य से सफर शुरू कर पत्रकारिता के शिखर तक पहुंचे हैं । इनके बारे में कहा जाता है  इनकी कलम लिखती नहीं बल्कि बोलती है, हर पाठक को इंतजार रहता है कि आज इन्होंने किस मुद्दे को अपनी कलम के माध्यम से आवाज दी होगी।  जी हां, हम बात कर रहें हैं खबरों के महारथी और दैनिक जागरण समाचार पत्र के राज्य ब्यूरो प्रमुख विकास धूलिया की। इन्टरव्यू लेते वक्त अपने सुलगते सवालों से सामने वाले को दांतो तले उगंली दबाने पर मजबूर कर देने वाले विकास धूलिया का पहला इन्टरव्यू आप भी पढि़ए ।
Yi शशि पारस- विकास  जी, अपने बारे में आप हमारे पाठकों  को कुछ बताएं  । 
विकास- मूल रूप से पौड़ी जिले के कोटद्वार शहर का रहने वाला हूं। पिताजी शिक्षक थे और माता गृहणी हैं । पिताजी के सानिध्य में नगर पालिका और सरकारी स्कूल से पढाई पूरी की। सरकारी कॉलेज से ही उच्च शिक्षा ग्रहण की। प्राचीन भारतीय इतिहास विषय में एमए करने के बाद जैंसे सभी युवा प्रतियोगी परीक्षाओं तैयारी और रोजगार की तलाश में जुट जाते हैं, मैं भी जुट गया । कुछ समय बाद शिक्षक पिता ने समझाया कि बीएड करोए एमएड करो। उसके बाद पिताजी  के निर्देश पर  बीएड किया। उसके बाद पत्रकारिता में रूचि थीए तो बैचलर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री ली। पत्रकारिता के गुणों को बारीकी से सीखा समझा और आज आपके सामने हूं ।   
Youth Icon Journalist Of the week के विशेष साक्षात्कार की कड़ी में शामिल हुए दैनिक जागरण उत्तराखंड के राज्य ब्यूरो प्रमुख विकास धूलिया ।
Youth Icon Journalist Of the week के विशेष साक्षात्कार की इस कड़ी में शामिल हुए दैनिक जागरण उत्तराखंड के राज्य ब्यूरो प्रमुख विकास धूलिया ।

Yi शशि पारस- प्रथम श्रेणी में बीएड करके शिक्षक बनने के बजाय आपको पत्रकार बनने की क्या सूझी। 

विकास-  कालेज की पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय समाचार पत्र नवभारत टाइम्स में संपादक के नाम पत्र कालम में पत्र लिखकर भेजता था। उसमें नियमित रूप से मेरे पत्र छपते थे। एक दिन मैने पिता से कहा कि मैने आपकी बात मान ली, अब चाहता हूं मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाऊं। उस दौरान घर में नवभारत टाइम्स आता था, पिताजी मेरे लिखे पत्र पढते थे। इस बीच पिताजी ने मुझे मुस्कराते हुए कहा जहां भी जाना है जाओ, लेकिन परिणाम जल्दी सामने आने चाहिए। अंदर से लिखने का जुनून था। लिखने में मुझे कोई कठिनाई नहीं हुई। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म की पढाई करते हुए 1995 में मुझे एक ब्रेक मिला। नवभारत टाइम्स से बतौर स्ट्रिंगर जुडने का। उस समय एक रूपया सैंतीस पैंसा पर सेंटीमीटर कॉलम के हिसाब से भुगतान होता था। पूरे महीने भर मेहनत और परिश्रम के बाद 1700 से 2000 रुपये तक मेहनताना निकल आता थाए लेकिन तब कठिन चुनौती भी थी । उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बना था। कोटद्वार उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और नवभारत राष्ट्रीय अखबार था। वहां से खबरों को निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था। मेरी खबरें प्रादेशिक पन्ने में बाईलाइन छपती थी। यह मीडिया जगत में किसी स्ट्रिंगर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। मुझे बहुत खुशी होती थी और मेहनत करने की प्रेरणा मिलती थी। यहीं से पत्रकारिता की शुरूआत हो गई। 
Yi शशि पारस-  नवभारत टाइम्स के स्ट्रिंगर से दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो प्रमुख बनने तक के सफर के बारे में भी हमारे पाठकों को कुछ बताएं।
विकास-  नवभारत टाइम्स से जुडने के कुछ समय बाद अमर उजाला से भी जुडने का मौका मिला। दोनों जगह काम करने लगा। अमर उजाला में अभी काम करते हुए कुछ ही समय हुआ था कि इसी बीच दैनिक जागरण से बुलावा आया। तीन हजार महीने पर दैनिक जा गरण से जुड गया।  कुछ महीने मैने डेस्क पर रहकर पत्रकारिता की बारीकियां सीखी। डेस्क पर काम करने के बाद 1998 में मुझे हरिद्वार रिपोर्टिग के लिए भेज दिया गया। हरिद्वार कुंभ से लौटने के बाद मुझे कोटद्वार भेजा गया। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने से ठीक पहले नवंबर 2000 में देहरादून में स्टेट ब्यूरो का गठन हुआ तो मुझे देहरादून बुला लिया गया। 16 अप्रैल 2000 को शादी हुई। तब भी महीने की पगार मात्र तीन हजार ही थी। 
19 मई 2013 में विकास धूलिया को यूथ आइकॉन अवार्ड (पत्रकारिता सम्मान) से तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, एवं देश के जाने माने पत्रकार क़मर वहीद नक़वी जी द्वारा सम्मानित किया गया था ।

Yi शशि पारस- आप पहाड़ का सच नाम से दैनिक जागरण में एक कॉलम लिखते थे। उसके बारे में कुछ बताएंए कैसी हुई इसकी शुरूआत।

विकास-  1999 में दैनिक जागरण में मुझे पहाड़ का सच नाम से एक कॉलम लिखने को कहा गया। उत्तर प्रदेश में रहते हुए उत्तराखण्ड के लिएए यानी इस पहाडी क्षेत्र के लिए सरकार की नीतियां कितनी अप्रासंगिक और अतार्किक हैं, यह इस कालम की विषय वस्तु थी।  इस दौरान मैने लगातार 72 हफ्तों तक लिखा। इस कॉलम को खूब सराहना मिली। सरकार ने भी इसमें छपे तथ्यों का संज्ञान लिया।
Yi शशि पारस-  वर्तमान पत्रकारिता के दौर को आप किस नजरिए से देख रहे हैं?
विकास-  यह बेहद चुनौती पूर्ण कार्य हो गया है अब। टीवी व सोशल मीडिया तेजी से आम जनता के बीच पैर पसार रहा है। आपको सुबह बतौर पत्रकार अखबार में एक अलग रूप से खबर को प्रस्तुत करना हैए यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। जाहिर सी बात है कि जितनी नई तकनीकें आई है, उनसे प्रतिस्पर्धा बढी है मीडिया में।  दूसरी बात यह कि आपसी प्रतिस्पर्धा में समाचारों का स्तर  गिरा है। आधी अधूरी सूचनाओं पर खबरें परोसी जा रही हैं। सोशल मीडिया में हो रहे काम में अभी स्तर सुधारने की जरूरत है। सोशल मीडिया के प्रति जागरूकता सराहनीय है लेकिन इसमें सचेत रहने की भी जरूरत है। खबरों में आगे निकलने व सनसनी फैलाने के चक्कर में आज खबरों का स्तर गिरा है। 
यूथ आइकॉन हिन्दी समाचार पत्र में प्रकाशित पत्रकार विकास धूलिया से संबन्धित विशेष रिपोर्ट ।

Yi शशि पारस-  सोशल मीडिया पर की जाने वाली आजकल की पत्रकारिता को अपना कितना गंभीर मानते हैं?

विकास-  अभी शुरुआती दौर ही यह इसका।  कई लोग बेहतरीन लिखते हैं लेकिन बगैर तथ्य लिखना उचित नहीं।  अभी गंभीरता का अभाव दिखाई देता है।  जब तक समझ विकसित नहीं होगी तब तक सोशल मीडिया की पत्रकारिता में गंभीरता नहीं आएगी। जल्द परिणाम की इच्छा घातक भी साबित हो सकती है।
Yi शशि पारस-  20 सालों से अधिक समय से आप सक्रिय पत्रकारिता में हैं। इस बीच अपने साथ के और अपने बीच के किन पत्रकारों की आप सराहना करना चाहते हैं।
विकास-  बहुत सारे हैं, इस वक्त कुछ ही नाम सूझ रहे हैं। युवा पत्रकार संजीव कंडवाल की लेखन शैली मुझे प्रभावित करती है। साथ ही वरिष्ठ पत्रकार केदार दत्त जिस तरह से खबरों को प्रस्तुत करते है उनका एक अलग ही नजरिया होता है। 
Yi शशि पारस-  2017 में आपको किसकी सरकार बनती हुई नजर आ रही है उत्तराखंड में?
विकास-  इस बार यह बड़ा सवाल है। इस समय यह पता लगा पाना मुश्किल हो रहा है कि 2017 में किसकी सरकार आ रही है। बीते चुनावों में साल छह महीने पहले यह पता चल जाता था लेकिन इस बार जनता का रूख भी नहीं भांपा जा रहा है। इसलिए इस बार यह कह पाना मुश्किल है कि 2017 में किसकी सरकार आएगी। हां इतना जरूर है कि एक पार्टी दर्जनों नेताओं के भरोसे चल रही है और दूसरी  पार्टी एक नेता के भरोसे। दोनों अलग-अलग कारणों से एक दूसरे पर भारी नजर आते हैं। 
Yi शशि पारस-  आज का पत्रकार जनता के सवालों के घेरे में क्यों आता है हर वक्त।
विकास- पत्रकार की लेखनी ही उसकी असली पहचान है, उसका बाहरी आवरण नहीं। आज अगर पत्रकार कठघरें में खडें हैं तो उन्हें इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। खबर पुख्ता होनी चाहिए, विश्वसनीयता होनी चाहिए उसमें, गंभीरता होनी चाहिए। खबर लिखते समय पत्रकारों को सयंम के साथ अपने शब्दों का चयन करना चाहिए। हम कुछ लोगों की रूचि के लिए अपने शब्दों को तोडमरोड़ नहीं सकते। एक पत्रकार की लिखी रिपोर्ट पाठकों के सामने उसकी गंभीरता स्वयं ही बयां कर देती है,  लेकिन मैं यह भी कहूंगा कि सबको आप एक तराजू में नहीं तोल सकते हैं। 
Yi शशि पारस-  मेरा एक अभियान हैं रंगोली आंदोलन। इस आंदोलन के तहत मेरी पिछले तीन वर्षों से यह मांग है कि पत्रकारों की संपत्ति की जांच होए उनके आय व्यय के साधन खंगाले जाएं? 
विकास-  बिल्कुल,आपके इस अभियान के बारे में जानता हूं और आपने इसको लेकर जो कुछ लिखा है वह भी मैने और साथी पत्रकारों ने पढा है। इस मुहिम में आपके साथ हैं। 
Yi शशि पारस- बहुत-बहुत धन्यवाद धूलिया जी आपका ।
तो यह थे मेरे साथ यूथ आइकॉन की इस विशेष  कड़ी में दैनिक जागरण समाचार पत्र  के उत्तराखंड राज्य ब्यूरो प्रमुख  विकास धूलिया जी जिन्होने अपने संघर्षों की कहानी को हम सबके साथ साझा किया । नि:संदेह नवोदित पत्रकारों के लिए हमारी यही विशेष पेशकस एक उचित मार्गदर्शन का कार्य भी करेगी । अगले हफ्ते होंगे हमारे साथ एक और  वह पत्रकार जिन्होने अपनी कलम ओ एक आंदोलन आ रूप दिया है ।  तब तक के लिए नमस्कार ।  
©  प्रस्तुति : शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’ ,  

Copyright: Youth icon Yi National Media, 16.12.2016

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यूथ  आइकॉन : हम न किसी से आगे हैं, और न ही किसी से पीछे ।

By Editor

One thought on “Journalist Of The Week Vikas Dhuliya : नवभारत टाईम्स के स्ट्रिंगर से दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो प्रमुख बनने तक का शानदार सफर ….!”
  1. शानदार साक्षात्कार, धूलिया जी निःसंदेह उच्चकोटि के पत्रकार और चिन्तक हैं।

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