सोचिए, 35,000 फीट पर आपका जहाज नीचे गिर रहा है, कॉकपिट खून से भरा है और आपके बगल में कोई कमांडो नहीं, सिर्फ एक डेंटिस्ट और एक प्लंबर बैठा है… आप क्या करेंगे? उस दिन इजराइलियों ने जवाब दे दिया।

  • प्लम्बर ने गिरने से रोका जहाज, तो डेंटिस्ट ने पायलट की जाती साँसे वापस लौटाई!
  • बिना वर्दी वाले सैनिकों का कमाल!

जहाज में सवार यात्री अगर अन्य देशों के होते तो भी हालात बिगड़ सकते थे…!

35000 फीट ऊँचे आसमान में जहाज पर छिड़ी जब जंग: जब एक भारतीय ने 174 जिंदगियां बचा लीं।

* अग्निबीर जवानों को इस घटना में मैंने क्यों जोड़ दिया? पढ़ियेगा जरूर और अपनी राय भी लिखियेगा कॉमेंट बॉक्स में।

यह सिर्फ एक हवाई घटना नहीं, यह हौसले की उड़ान की कहानी है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट FZ1073 में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को बता दिया कि असली सुरक्षा वर्दी में नहीं, जज्बे में होती है।

30 सितंबर 2026, फ्लाइट में 174 यात्री। कॉकपिट में कैप्टन और को-पायलट। अचानक को-पायलट, जो ओमान का नागरिक बताया जा रहा है, ने अपनी मंशा दिखाई। उसने जेब में रखे चाकू से कैप्टन पर हमला कर दिया।

* सलाम उस भारतीय जांबाज को:

वह भारतीय पायलट अपने बगल में बैठे आतंकी मंशा वाले को-पायलट की साजिश को भांप नहीं पाया, लेकिन जब हमला हुआ तो उसने हार नहीं मानी। चाकुओं से सिर और हाथों पर गहरे जख्म, खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मित माछर ने आखिरी ऊर्जा बटोरी और कॉकपिट का लॉक खोल दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने खुद अपने बयान में कहा – उसने अपने आखिरी पलों की ताकत से दरवाजा खोला। अगर वह दरवाजा न खुलता तो 174 लोगों के साथ जहाज इजराइल में कहीं क्रैश कर दिया जाता। फ्लाइट का डेटा बताता है कि जहाज एक मिनट से भी कम में 14,000 से 17,400 फीट नीचे गोता लगा गया था।

* घबराए नहीं यात्री, दिखाया अदम्य साहस:

आम तौर पर ऐसी स्थिति में भगदड़ मच जाती है। लेकिन इस जहाज में सवार यात्रियों ने चीखने के बाद संभलना चुना। वे कॉकपिट की ओर दौड़े, न कि पीछे भागे।

* सवारी के वेश में डॉक्टर:

उन्हीं यात्रियों में एक थे डॉ. शोता मूसेव, पेशे से डेंटिस्ट। वह सबसे पहले कॉकपिट में पहुंचे। उन्होंने देखा कि हमलावर कैप्टन के ऊपर बैठा उसे गोद रहा है। डॉ. मूसेव ने खुद बताया पायलट के सिर और हाथ लगभग दो टुकड़ों में कट गए थे, ब्लड प्रेशर गिर चुका था। अगर कुछ मिनट और देर होती तो हम उसे खो देते। उन्होंने हवा में ही खून रोककर कैप्टन की जान बचाई। कैप्टन उस वक्त सिर्फ प्रार्थना कर रहे थे।

* सवारी के वेश में जवान :

इजराइली यात्री यानिव हयून, जिन्हें पेशे से प्लंबर बताया गया, वो कॉकपिट में घुसे। उन्होंने आतंकी को-पायलट को पीछे से पकड़कर चोकहोल्ड में जकड़ा और बाहर खींचा। यानिव ने टीवी पर देखे अंदाज में कंट्रोल स्टिक को खींचा और जहाज को और नीचे जाने से रोका। फिर हेडफोन की केबल और प्लास्टिक टाई से आतंकी को बांधकर पुलिस के हवाले करने की तैयारी की।

* सवारी के वेश में ही मौजूद थे असली पायलट:

किस्मत से उस फ्लाइट में दो अन्य रिलीफ पायलट भी यात्री के तौर पर मौजूद थे। एक ब्रिटिश मूल का पायलट बताया जा रहा है। उन्होंने तुरंत कॉकपिट संभाला और बुरी तरह से क्षतिग्रस्त रडर के बावजूद जहाज को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सकुशल लैंड करवा दिया। आज कैप्टन माछर दुबई में स्थिर हैं।

* कौन हैं हीरो कैप्टन स्मित मच्छर?

भारतीय नागरिक, उम्र लगभग 39 साल। पिछले 15 सालों से कमर्शियल एविएशन में। बोइंग 737 पर लगभग 10,000 घंटे उड़ान का अनुभव। फ्लाईदुबई के सीईओ ने उन्हें Above Average पायलट कहा है। पीएम नरेंद्र मोदी और इजराइल सरकार ने उन्हें HERO कहा है। वह इस समय अस्पताल में हैं और भारत का गौरव बन चुके हैं।

*मेरा सवाल: अगर यात्री इजराइली न होते तो क्या होता ?

यही वह एंगल है जो मुझे अभी तक किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखा। मेरा अपना मत है, अगर इस विमान में इजराइल के बजाय किसी अन्य देश के यात्री होते तो शायद कहानी कुछ और होती। शायद घबराहट जीत जाती।

इजराइल दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहाँ हर नागरिक को कुछ समय सेना में बिताना अनिवार्य है। वहां देशभक्ति कोई नारा नहीं, ट्रेनिंग है। दुश्मन से लड़ने का हौसला उनके डीएनए में है। तभी तो बिना सुरक्षा कर्मी, बिना पुलिस के, एक प्लंबर, एक डेंटिस्ट और आम यात्रियों ने एक सैन्य ऑपरेशन जैसा रेस्क्यू कर दिखाया। वही सैन्य अभ्यास इस विशाल त्रासदी को न्यूनतम स्तर पर ले आया।

* यही मौका अग्निवीर को समझने का यही सबसे सही वक्त है :

सेना में अग्निवीर चयन प्रक्रिया का विरोध करने वालों को अब थोड़ा गैर राजनीतिक होकर सोचना होगा, कि आखिर भारत में अग्निवीर का विरोध क्यों? अगर हमारे हर युवा को भी 3 से 10 साल राष्ट्र सेवा के लिए सेना का हिस्सा बनना अनिवार्य हो, जैसा इजराइल में है, तो उसका आत्मविश्वास आसमान छुएगा।

यह एक मिथ है कि जितने भी युवा अग्निवीर प्रक्रिया से सेना में भर्ती हुए वह सब वापस आ जाते हैं और बेरोजगार हो जाते हैं। हकीकत तो यह है कि अग्निवीर में चयनित युवाओं में से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सेना में ही परमानेंट किया जाता है। और जो 3 साल बाद भी वापस समाज में लौटता है, वह कोई बेरोजगार नहीं, बल्कि एक परिश्रमी, अनुशासित और बुलंद हौसलों वाला नागरिक होता है। वह किसी भी सूरत में बेरोजगार नहीं रह सकता।

होना तो यह चाहिए कि भारत के हर नागरिक के लिए राष्ट्र सेवा अनिवार्य हो। तब हर फ्लाइट, हर बस, हर गली में एक सैनिक मौजूद होगा, भले ही वह सवारी के वेश में क्यों न हो।

यह कहानी सिर्फ एक पायलट की नहीं, उस सोच की है जो युवाओं को सिखाती है, वर्दी पहनने से पहले जज्बा पहनो।

युवा वर्ग खासकर इसे अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी याद करें…

इजराइल में हर नागरिक का सेना में होना अनिवार्यता की हकीकत क्या है?

इजराइल में इसे Conscription कहते हैं, इसका कानून है Defence Service Law 1949.

1. कौन जाता है?

  • 18 साल होते ही हर यहूदी लड़का और लड़की को सेना में जाना होता है।
  • इसके अलावा द्रूज और सर्कसियन समुदाय के नागरिकों के लिए भी अनिवार्य है।
  • अरब मूल के मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को छूट है, वो चाहें तो Volunteer कर सकते हैं। 8f73

2. कितने समय के लिए?

  • अभी के नियम से लड़कों के लिए 32 महीने (2 साल 8 महीने) और लड़कियों के लिए 24 महीने (2 साल) ।
  • इजराइल सरकार अभी इसे बढ़ाकर लड़कों के लिए 36 महीने करने पर विचार कर रही है, क्योंकि सेना में लगभग 15,000 सैनिकों की कमी है।

3. उसके बाद क्या?

  • ड्यूटी खत्म होने के बाद भी कहानी खत्म नहीं होती। पुरुषों को 40 साल (अफसरों को 45 साल) तक रिजर्व फोर्स में रहना पड़ता है। हर साल 30-39 दिन की ट्रेनिंग के लिए वापस बुलाया जाता है। 8f73

4. छूट किसे मिलती है?

  • मेडिकल / साइकोलॉजिकल कारण से अनफिट लोग।
  • शादीशुदा महिलाएं, धार्मिक यहूदी महिलाएं Sherut Leumi (वैकल्पिक राष्ट्रीय सेवा) कर सकती हैं।
  • पहले अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (Haredi) यहूदियों को पढ़ाई के नाम पर छूट मिलती थी, लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खत्म कर दिया है, इसीलिए अब वहां इस पर बहुत राजनीतिक हंगामा चल रहा है।

रिपोर्ट शशि भूषण मैठाणी पारस

आंकडे सोर्स – गूगल

फोटो साभार : तमाम सोशल मीडिया माध्यम से।

नोट: (यह पोस्ट मैंने कल से आज तक इंटरनेट पर तमाम खबरों को पढ़ने के बाद लिखी है। जहाज क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ ये तो आप सब जानते हैं लेकिन मैंने इसमें एक वो ख़ास बात जोड़ी है जो अभी तक किसी मीडिया प्लेटफार्म पर पढ़ने, सुनने को नहीं मिली। मैंने गूगल से इजराइल सैन्य व्यवस्था का छोटा अंश भी लिया जिसे इसमें जोड़ा है ताकि हमारे युवा प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु उसे याद रखें।)

By master

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *