देहरादून: उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने नैनीताल से पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाकर सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। दिनेश आर्य का नाम आने सें बड़े बड़े दिग्गजों के अरमान चकनाचूर हो गए। यहाँ बताते चलें कि 15 नामों की पैनल में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक, नरेश बंसल, मदन कौशिक जैसे बड़े नाम थे, लेकिन पार्टी ने दूसरी पंक्ति के नेता पर दांव लगाया है। पार्टी के चयन सें सभी भौचक रह गए।
आर्य अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं व एक सामान्य परिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। वह 2013 से 2016 तक नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे और 2017 में एससी मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बने। 2017 और 2022 में वह नैनीताल आरक्षित सीट से दावेदार थे, लेकिन दोनों बार कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं, संजीव आर्य और सरिता आर्य, को टिकट मिला था। बाद में पुष्कर सिंह धामी सरकार में उन्हें पेयजल अनुश्रवण परिषद में उपाध्यक्ष का दायित्व दिया गया था।
चुनावी लिहाज से मायने :
भाजपा के इस फैसले को 2027 उत्तराखंड राज्य में विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
1. दलित वोट बैंक: राज्य में SC आबादी करीब 19% है, जो कई सीटों पर निर्णायक है।
2. कुमाऊं-गढ़वाल संतुलन: राज्य बनने के बाद कुमाऊं से भाजपा ने सिर्फ भगत सिंह कोश्यारी को राज्यसभा भेजा था, जबकि गढ़वाल से महेंद्र भट्ट, अनिल बलूनी, नरेश बंसल जैसे नाम गए।
3. संगठन को संदेश: लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ता को मौका देकर निष्ठावान कैडर को बनाए रखने की कोशिश।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाने वाले आर्य को आगे कर भाजपा ने एक तीर से संगठन, सामाजिक और क्षेत्रीय तीनों समीकरण साधने का प्रयास किया है।
( यूथ आइकॉन मीडिया )