सरकार के एक फैसले के बाद वाया श्रीलंका भेजनी पड़ी फैक्स से सूचना। सेना अर्ध सेना कुल मिलाकर सभी बलों के हाथ पांव फूले। किसी ने ये नहीं सोचा था कि ऐसा भी हो जाएगा। आसमान को छावनी में बदल दिया।

दरअसल यह आगे भड़की उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष के हस्ताक्षर वाले ज्ञापन के बाद, जिसके बाद सभी कर्मचारी संगठन एक हुए और देखते ही देखते बात देश विदेश के बाद परलोक पहुंच गई। सरकार द्वारा ऐन मौके पर महिलाओं के लिए अवकाश घोषित किए जाने के बाद पुरुष समाज में भारी असंतोष की ऐसी ज्वाला भड़की कि उसकी तपिश सीधे दूर वहाँ तक तलक तक जा पहुँची, जहां तक पहुँचनी नहीं चाहिए थी !

आमतौर पर करवाचौथ पर महिलाएँ सुबह-सुबह उठकर पतियों के लिए टिफिन तैयार करती हैं। लेकिन इस बार सरकारी अवकाश ने घर की व्यवस्था का पूरा गणित ही बिगाड़ दिया।

महिलाओं का तर्क था कि जब सरकार उन्हें आराम करने का अवसर दे रही है, तो वे घर की दूसरी सरकार यानी पतियों का पेट भरने के लिए रसोई में क्यों खपें ? आखिर पतियों को भी तो कभी भूखे रहकर #आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलना चाहिए!

बस फिर क्या था!

आज सुबह से ही सरकारी दफ्तरों की कैंटीनों में पतियों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि समोसे, कचौड़ियाँ, छोले-भटूरे और दाल-चावल देखते ही देखते इतिहास बन गए। कैंटीन संचालकों ने हाथ जोड़कर कहा— साहब, राशन जितना था, उतना दे दिया। अब रसोई में केवल खाली भगोने और हमारी बेबसी बची है!

इस पर भूखे पतियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। भूखे पतियों ने तो यहाँ तक चेतावनी दे दी कि यदि तत्काल भोजन नहीं मिला तो वे अगली करवाचौथ पर सामूहिक रूप से व्रत रखेंगे!

मामले की गंभीरता को देखते हुए #सचिवालय संघ, #राजकीय_शिक्षक संघ और #राजकीय_कर्मचारी महासंगठन #पुरुष_उत्पीड़न का ज्ञापन सीधे इंद्र महल भेज दिया। मांग की कि यदि महिलाओं को अवकाश मिलता है, तो पुरुषों को भी समान अधिकार दिया जाए। अन्यथा पतियों के #बटुए पर पत्नियों के #एकाधिकार की #समीक्षा हो।

करवाचौथ के दिन प्रत्येक सरकारी कार्यालय में पुरुषों के लिए विशेष #भोजन_भत्ता दिया जाए। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करते समय संघ के अध्यक्ष की #आँखें #नम थीं।

#इंद्रलोक में #हाई_अलर्ट!

ज्ञापन पढ़ते ही देवराज इंद्र का आसन डोल गया। उन्होंने तत्काल आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई। उन्होंने #मुख्यमंत्री जी को फोन किया! मुख्यमंत्री ने कहा.. देवराज मैं स्वयं पुरुष हूँ और आप भी मैंने तो मातृशक्ति का सम्मान किया है उनका मान बढ़ाया है। मैं भी तो अपने सरकारी कार्यों का सम्पादन कर रहा हूँ। देवराज इंद्र बोले.. हम्म्म CM साहब की बात तो सही है.. लेकिन पृथ्वीलोक के पुरुषो को मेरा दिया हुआ वचन / भरोसा भी नहीं टूटना चाहिए उन्होंने तुरंत

पवन देव को आदेश किया, #पृथ्वीलोक पर #सूरज की रोशनी रोकने के लिए बादलों की मोटी चादर बिछा दो। मामला पतियों की भूख का है, लेकिन परिणाम #चंद्रमा की पेशी तक जाना चाहिए!

#समुद्र_देव को निर्देश मिला कि वे करोड़ों क्यूबिक पानी लेकर बादलों के पीछे तैयार रहें। बादलों को दोपहर तीन बजे से सुबह छह बजे तक आसमान के चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहने का फरमान जारी हुआ।

#डाकिनी, #शाकिनी, #एड़ी_आछरी, #ग्वारील #भेरों और तमाम अदृश्य शक्तियों को भी आदेश दिया गया कि वे शांत रहें किसी को डराएं धमकाएं नहीं , लेकिन किसी भी कीमत पर #चाँद_की_रोशनी धरती तक नहीं पहुँचनी चाहिए!

उधर चंद्रलोक के #राजदूत को #इंद्रसभा में तलब किया गया। राजदूत के सामने पतियों का दर्दभरा ज्ञापन रखा गया और फैक्स के माध्यम से चंद्रमा तक संदेश पहुँचाया गया, आज रात अपनी रोशनी पृथ्वीलोक तक पहुँचाने में विलंब करें। मामला बेहद संवेदनशील है!

चन्द्रमा बोले देवराज! मैं कोई #सरकारी_कर्मचारी नहीं हूँ कि जब चाहा छुट्टी दे दी और जब चाहा ड्यूटी पर बुला लिया! मेरा भी एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। वर्ष 2021 में पृथ्वीलोक और चंद्रलोक के बीच हुए समझौते का उल्लंघन मैं नहीं कर सकता! फिर चंद्रदेव ने जो कहा, उसे सुनकर पूरी इंद्रसभा में सन्नाटा छा गया। और एक बात सुन लीजिए इंद्र महाराज! आज की रात मेरे लिए बहुत खास है। पृथ्वीलोक की #महिलाएँ कई दिनों से मेरे दर्शन की तैयारी कर रही हैं। किसी ने नई #साड़ी खरीदी है, किसी ने #गहने, किसी ने #मेकअप किट और किसी ने पति की जेब का बजट ही चंद्रलोक के नाम कर दिया है।

अब ऐसी समर्पित देवियों को मैं निराश कैसे कर दूँ? रही पतियों की बात, तो मुझे तो इसमें भी आपकी कोई गहरी साजिश लगती है। वरना पृथ्वीलोक के पतियों में इतनी हिम्मत कहाँ कि करवाचौथ के दिन अपनी पत्नी के सामने छुट्टी या समान अधिकार की मांग कर सकें!

चंद्रमा का यह बयान सुनकर इंद्रदेव का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। फिर देहरादून में शुरू हुआ जलप्रलय का ट्रेलर! इंद्रदेव ने तत्काल दूसरी कैबिनेट बैठक बुलाई और आदेश दिया, जब चंद्रमा समझौते की दुहाई दे रहा है, तो उसे रोशनी देने से पहले मौसम विभाग की परिस्थितियों का सामना करना होगा!

बादलों को और घना होने का निर्देश दिया गया। पवन देव को निगरानी सौंपी गई और समुद्र देव को पर्याप्त जलराशि के साथ तैयार रहने को कहा गया।

तब से देहरादून और आसपास के इलाकों में बारिश ने ऐसा डेरा जमाया कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही! बादलों की मोटी चादर ने चाँद को चारों तरफ से घेर लिया है।

इंद्रदेव ने आकाशवाणी कर पृथ्वीलोक की सरकार को चेतावनी दी, अवकाश के मामले में भेदभाव बंद करो! यदि पुरुषों को छुट्टी नहीं दे सकते, तो कम से कम पतियों के बटुए तक पत्नियों की पहुँच पर समानता के सिद्धांत लागू करो। अन्यथा अगली बार बादल नहीं, पूरा मानसून सचिवालय के बाहर धरना देगा!

उधर चाँद का इंतजार, इधर मेकअप पर संकट!

अब सबसे बड़ा संकट उन सुहागिनों के सामने खड़ा हो गया है, जिन्होंने सुबह से ही सोलह शृंगार करके चंद्रदेव की प्रतीक्षा शुरू कर दी थी। किसी का आईलाइनर बारिश में बह गया, किसी की लिपस्टिक ने पलायन कर लिया और किसी का फाउंडेशन गालों से उतरकर ठुड्डी तक पहुँच गया। कुछ पतियों ने तो अपनी पत्नी की ओर देखकर मन ही मन प्रार्थना शुरू कर दी,

हे चंद्रदेव! आज जल्दी मत निकलना। घरवाली का मेकअप तो उतर गया है, लेकिन अगर आपने दर्शन दे दिए तो हमें छलनी से देखने के बाद जो पहला दर्शन मिलेगा, उसमें हमारा असली चेहरा भी शामिल होगा!

एक पति ने तो दावा किया कि उसने पत्नी को मेकअप उतरने के बाद पहचानने के लिए आधार कार्ड तक माँग लिया!

हालाँकि इस खबर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। उधर कुछ पतियों का कहना है कि यदि चाँद आज नहीं निकला, तो कम से कम एक दिन के लिए उन्हें भूख, कैंटीन और घरेलू बजट, तीनों से मुक्ति मिल जाएगी।

भाइयों! ज्यादा खुश मत होइए। चाँद आज निकले या कल, पत्नी का हिसाब-किताब जरूर निकलेगा! पुरुष कर्मचारी महासंगठन की अगली रणनीति! सूत्रों के अनुसार, पुरुष कर्मचारी महासंगठन अब अगली करवाचौथ से पहले तीन नई मांगें रखने की तैयारी कर रहा है,

* करवाचौथ पर पुरुषों के लिए भी सवैतनिक अवकाश।

* हर सरकारी कैंटीन में पति विशेष भोजन योजना ।

* पत्नी के मेकअप, साड़ी और गहनों के बजट के साथ * पति के लिए भी एक सम्मानजनक जेब खर्च।

.हालाँकि महिला कर्मचारी संघ ने इन मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, अभी तो केवल करवाचौथ का अवकाश मिला है। पतियों को समान अधिकार चाहिए तो पहले एक दिन बिना शिकायत घर के काम करके दिखाएँ! यह बयान सुनते ही पुरुष महासंगठन की आपात बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। कारण बताया गया, सभी पदाधिकारी घर से लगातार फोन आने के कारण बैठक छोड़कर रवाना हो गए।

.फिलहाल देहरादून में बारिश जारी है, चाँद बादलों की हिरासत में है और पतियों की निगाहें आसमान के साथ-साथ घर की रसोई पर भी टिकी हैं।

अब देखना यह है कि पहले चाँद निकलता है या पतियों की भूख दम तोड़ती है! और हाँ, जिन पतियों ने आज अपनी पत्नी से मजाक में भी कह दिया है कि… तुम्हारा मेकअप उतर गया है, उनसे विनम्र निवेदन है कि रात का भोजन मिलने तक अपना मोबाइल और यह पोस्ट दोनों पत्नी से दूर रखें। क्योंकि चाँद का निकलना तो प्राकृतिक घटना है, लेकिन पत्नी का गुस्सा घरेलू आपदा!

हे दीदा, भुल्लो… यह पूरी पोस्ट विशुद्ध हास्य-व्यंग्य है। इसका किसी वास्तविक सरकारी आदेश, कर्मचारी आंदोलन या इंद्रलोक की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से कोई संबंध नहीं है।

शशि भूषण मैठाणी पारस

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